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11 साल बाद सालगांवकर ने फिर जीता डूरंड कप
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 09 Nov 2014 04:37 PM IST
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सलगांवकर एफसी ने पुणे एफसी पर एकमात्र गोल से जीत दर्ज कर तीसरी बार डूरंड कप खिताब अपने नाम किया।
मडगांव में खेले गए खिताबी मुकाबले में सलगांवकर का ज्यादा समय तक गेंदों पर कब्जा रहा और रैया पंचायत ग्राउंड पर थांगजाम सरण सिंह ने 21वें मिनट में सलगांवकर के लिए अहम गोल दागा। रोकस लामरे ने मध्य से सरण सिंह को पास दिया, जिन्होंने कई डिफेंडरों को छकाते हुए गेंद को गोलजाल में पहुंचा दिया और आखिरी तक यह निर्णायक गोल साबित हुआ।
पुणे एफसी के पास पहले हाफ के आखिरी क्षणों में गोल का बेहतरीन मौका था लेकिन मेजबान टीम के गोलकीपर करणजीत सिंह ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। प्रकाश थोराट के लंबे शॉट पर करणजीत ने गेंद को बार के ऊपर से बाहर कर दिया।
दूसरे हाफ में दोनों ही टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। मेहमानों ने मैच के अंतिम क्वार्टर तक बराबरी करने की पूर जोर कोशिश की लेकिन कीपर करणजीत ने एक बार फिर स्थानापन्न इरिक ब्राउन के शॉट को डाइव लगाकर बचाया।
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सलगांवकर के कोच डेरिक परेरा ने दो बार ट्रॉफी जीती। एक बार उन्होंने बतौर कोच और एक बार बतौर खिलाड़ी उन्होंने ट्रॉफी जीती। इस जीत को उन्होंने खास पल करार दिया।
विजेता टीम को 25 लाख रुपए दिए गए जबकि पुणे एफसी को 15 लाख रुपए मिले। दो सेमीफाइनलिस्ट टीम बंगलूरू एफसी और स्पोर्टिंग क्लब डी गोवा को पांच-पांच लाख रुपए का इनाम मिला।
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मडगांव में खेले गए खिताबी मुकाबले में सलगांवकर का ज्यादा समय तक गेंदों पर कब्जा रहा और रैया पंचायत ग्राउंड पर थांगजाम सरण सिंह ने 21वें मिनट में सलगांवकर के लिए अहम गोल दागा। रोकस लामरे ने मध्य से सरण सिंह को पास दिया, जिन्होंने कई डिफेंडरों को छकाते हुए गेंद को गोलजाल में पहुंचा दिया और आखिरी तक यह निर्णायक गोल साबित हुआ।
पुणे एफसी के पास पहले हाफ के आखिरी क्षणों में गोल का बेहतरीन मौका था लेकिन मेजबान टीम के गोलकीपर करणजीत सिंह ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। प्रकाश थोराट के लंबे शॉट पर करणजीत ने गेंद को बार के ऊपर से बाहर कर दिया।
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दूसरे हाफ में दोनों ही टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। मेहमानों ने मैच के अंतिम क्वार्टर तक बराबरी करने की पूर जोर कोशिश की लेकिन कीपर करणजीत ने एक बार फिर स्थानापन्न इरिक ब्राउन के शॉट को डाइव लगाकर बचाया।
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सलगांवकर के कोच डेरिक परेरा ने दो बार ट्रॉफी जीती। एक बार उन्होंने बतौर कोच और एक बार बतौर खिलाड़ी उन्होंने ट्रॉफी जीती। इस जीत को उन्होंने खास पल करार दिया।
विजेता टीम को 25 लाख रुपए दिए गए जबकि पुणे एफसी को 15 लाख रुपए मिले। दो सेमीफाइनलिस्ट टीम बंगलूरू एफसी और स्पोर्टिंग क्लब डी गोवा को पांच-पांच लाख रुपए का इनाम मिला।