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जन्मदिन विशेष: भारतीय फुटबॉल को भूटिया ने दी नई पहचान

Fri, 14 Dec 2012 11:09 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 14 Dec 2012 11:09 PM IST
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birthday special bhutia has given new identities of indian football

भारत में फुटबॉल की बात हो और बाईचुंग भूटिया का नाम न आए ये संभव नहीं है। फुटबॉल को अपना पहला प्यार समझने वाले भूटिया का जन्म 15 दिसंबर 1976 को हुआ था। फुटबॉल का यह सितारा 36 साल का हो गया है। भारत के सिक्किम में जन्मा यह फुटबॉल खिलाड़ी भारत में वहीं अहमियत रखता है जो इंग्लिश फुटबॉल जगत में डेविड बैकहम और रुनी, फ्रांस में जिनेदिन जिदान, पुर्तगाल में क्रिस्टियानो रोनाल्डो व ब्राजील के रोनाल्डो का है।

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छोटी उम्र से ही फुटबॉल के प्रति उनके लगाव ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मात्र 11 वर्ष की उम्र में ही उन्हें ताशी नंग्याल अकादमी (गंगटोक) की ओर से फुटबॉल की साई स्कॉलरशिप मिल गई थी। 16 साल की उम्र में सन्तोष ट्रॉफी में उन्होंने अपना कौशल दिखाया और इसी के परिणाम स्वरूप उन्हें ईस्ट बंगाल टीम में शामिल कर लिया गया। इसके बाद 1999 में उन्हें बेलायत के ब्यूरी क्लब में एफसी के तरफ से खेलने का मौका मिला। बाईचुंग भारत फुटबॉल टीम के कप्तान भी रहे है।
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इस खिलाड़ी की प्रतिभा का आकलन आप इसी बात से कर सकते है कि एलजी एशियन क्लब 2003 में सर्वाधिक 9 गोल करके भूटिया 'गोल्डन बूट' से नवाजे गए थे। इसी दौरान कलकत्ता डरबी में सर्वाधिक 14 गोल जिसमे ईस्ट बंगाल की ओर से 13 और मोहन बागान की ओर से 01 गोल का रिकॉर्ड बनाया। फुटबॉल के मैदान में उनके विपक्षी खिलाड़ी उन्हें विज किड, क्राइसिस मैन, वंडर किड व स्कॉरपियन के नाम से पहचानते हैं।
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वर्ष 2004 में भूटिया ने माधुरी नाम की लड़की के साथ सात फेरे ले लिए और अपने जीवन को आगे बढ़ाया। भूटिया न सिर्फ फुटबॉल के मैदान के कारण चर्चा में रहते है बल्कि कई सामाजिक कार्य से भी जुड़ने के कारण उन्हें पहचान मिली। भारतीय फुटबॉल में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2008 के पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके बावजूद वह खुद को भारतीय फुटबॉल का सबसे बड़ा सितारा नहीं मानते है उनकी नजर में सुनील छेत्री उनसे बेहतर है। हालांकि विश्व फुटबॉल में वह सबसे बड़ा सितारा डिएगो माराडोना को मानते है।

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