{"_id":"66a781c0af0279538200518c","slug":"difficult-journey-of-6000-km-for-paris-olympics-story-of-struggle-of-afghan-judo-player-arab-sibghatullah-2024-07-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Paris Olympics: ओलंपिक के लिए 6000 किमी की कठिन यात्रा...पढ़ें इस अफगान जूडो खिलाड़ी की संघर्ष यात्रा की कहानी","category":{"title":"Sports","title_hn":"खेल","slug":"sports"}}
Paris Olympics: ओलंपिक के लिए 6000 किमी की कठिन यात्रा...पढ़ें इस अफगान जूडो खिलाड़ी की संघर्ष यात्रा की कहानी
Mon, 29 Jul 2024 05:19 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Mon, 29 Jul 2024 05:19 PM IST
सार
अफगानिस्तान में टीवी पर जूडो की विश्व चैम्पियनशिप देखकर उन्हें इस खेल से मुहब्बत हो गई लेकिन उनके शौक को परवान चढाने का कोई जरिया नहीं था।
विज्ञापन
सिबगातुल्लाह
- फोटो : Paris Olympics
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ओलंपिक खेलने पहुंचे लगभग सभी खिलाड़ियों को तैयारियों के लिये पूरी सुविधायें दी जाती है लेकिन जब खिलाड़ी युद्ध से जर्जर अफगानिस्तान जैसे देश से हो तो उसे खेलों के इस महासमर में भाग लेने का अपना सपना पूरा करने के लिये छह हजार किलोमीटर और पांच देशों की यात्रा भी करनी पड़ सकती है।
अफगानिस्तान के जूडो खिलाड़ी सिबगातुल्लाह अरब 2021 में तालिबान के कब्जे वाले अफगानिस्तान से भाग निकले। इसके बाद पांच देशों में शरण ली और आखिर में 6000 किलोमीटर का सफर तय करके जर्मनी पहुंचे। वह अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की शरणार्थी टीम का हिस्सा हैं और पेरिस ओलंपिक में पुरूषों की जूडो स्पर्धा के 81 किलोवर्ग में उतरेंगे।
अफगानिस्तान में टीवी पर जूडो की विश्व चैम्पियनशिप देखकर उन्हें इस खेल से मुहब्बत हो गई लेकिन उनके शौक को परवान चढाने का कोई जरिया नहीं था। तालिबान के कब्जे के बाद वह यूरोप भाग गए जिस समय उनकी उम्र सिर्फ 19 साल थी। उन्होंने कहा, 'जब मैंने अफगानिस्तान छोड़ा तो पता नहनीं था कि बचूंगा या नहीं। इतनी दिक्कतें झेली है।' नौ महीने में उन्होंने ईरान, तुर्किये, यूनान, बोस्निया और स्लोवेनिया की यात्रा की और आखिर में जर्मनी में बस गए।
विज्ञापन
उन्होंने कहा, 'रास्ते में मेरी तबीयत बहुत बिगड़ गई थी और मैं तनाव में भी था।' मोंशेंग्लाबाख में एक जूडो क्लब से जुड़े इस खिलाड़ी ने मैड्रिड में 2023 यूरोपीय ओपन में सातवां स्थान हासिल किया । उन्होंने कहा , 'मेरे माता पिता अभी भी अफगानिस्तान में हैं और मुझसे रोज बात होती है । वे मुझे अच्छे प्रदर्शन के लिये प्रेरित करते हैं।'
विज्ञापन
अफगानिस्तान के जूडो खिलाड़ी सिबगातुल्लाह अरब 2021 में तालिबान के कब्जे वाले अफगानिस्तान से भाग निकले। इसके बाद पांच देशों में शरण ली और आखिर में 6000 किलोमीटर का सफर तय करके जर्मनी पहुंचे। वह अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की शरणार्थी टीम का हिस्सा हैं और पेरिस ओलंपिक में पुरूषों की जूडो स्पर्धा के 81 किलोवर्ग में उतरेंगे।
विज्ञापन
अफगानिस्तान में टीवी पर जूडो की विश्व चैम्पियनशिप देखकर उन्हें इस खेल से मुहब्बत हो गई लेकिन उनके शौक को परवान चढाने का कोई जरिया नहीं था। तालिबान के कब्जे के बाद वह यूरोप भाग गए जिस समय उनकी उम्र सिर्फ 19 साल थी। उन्होंने कहा, 'जब मैंने अफगानिस्तान छोड़ा तो पता नहनीं था कि बचूंगा या नहीं। इतनी दिक्कतें झेली है।' नौ महीने में उन्होंने ईरान, तुर्किये, यूनान, बोस्निया और स्लोवेनिया की यात्रा की और आखिर में जर्मनी में बस गए।
विज्ञापन
उन्होंने कहा, 'रास्ते में मेरी तबीयत बहुत बिगड़ गई थी और मैं तनाव में भी था।' मोंशेंग्लाबाख में एक जूडो क्लब से जुड़े इस खिलाड़ी ने मैड्रिड में 2023 यूरोपीय ओपन में सातवां स्थान हासिल किया । उन्होंने कहा , 'मेरे माता पिता अभी भी अफगानिस्तान में हैं और मुझसे रोज बात होती है । वे मुझे अच्छे प्रदर्शन के लिये प्रेरित करते हैं।'