फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Sports ›   CWG 2022 Silver medal Winner BindyaRani said now I will not let my mother sell vegetables

Commonwealth Games 2022: रजत जीतकर बिंदिया बोलीं-अब मां को सब्जी नहीं बेचने दूंगी, रेलवे में नौकरी पाकर खुश

Mon, 01 Aug 2022 08:32 AM IST
शक्तिराज सिंह हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला ब्यूरो, बर्मिंघम
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला ब्यूरो, बर्मिंघम Published by: शक्तिराज सिंह Updated Mon, 01 Aug 2022 08:32 AM IST
सार

अगर बिंदिया रानी का दूसरा प्रयास असफल नहीं होता तो उनके पास स्वर्ण पदक जीतने का मौका था। मुकाबले से पहले मीराबाई चानू उनके पास पहुंची थीं और अपना स्वर्ण उनके हाथ में रखकर कहा था कि तुम्हें भी यही जीतना है, लेकिन बिंदिया इस बार मीराबाई का सपना नहीं पूरा कर पाईं। 
 

विज्ञापन
CWG 2022 Silver medal Winner BindyaRani said now I will not let my mother sell vegetables
बिंदियारानी देवी पदक जीतने के बाद - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मणिपुर की बिंदिया रानी और उनकी मां की आंखों में इस वक्त खुशी के आंसू हैं। 55 किलो में बिंदिया को मिला रजत उनकी जिंदगी बदलने वाला है। यह वह खुद जानती हैं। बिंदिया को बड़ा करने के लिए उनकी मां को सब्जी बेचनी पड़ी। बिंदिया कहती हैं कि उन्हें पदक मिला है। अब वह मां को सब्जी नहीं बेचने देंगी। यही नहीं कंपटीशन में जाने से पहले मीरा उनके पास आईं और अपना स्वर्ण उनके हाथ में रख दिया। वह बोलीं तुम्हें भी यही स्वर्ण लेकर आना है। हालांकि बिंदिया सिर्फ एक किलो से स्वर्ण जीतने से चूक गईं।
विज्ञापन

पदक के लिए पांच किलो बढ़ोतरी
बिंदिया रानी के अंतरराष्ट्रीय कॅरिअर में यह पहला मौका था, जब उन्होंने एक लिफ्ट से दूसरी लिफ्ट में सीधे पांच किलो की बढ़ोतरी कर दी। बिंदिया और कोच विजय शर्मा के पास इसके अलावा कोई चारा भी नहीं था। पहली 111 किलो की क्लीन एंड जर्क पास करने के बाद उनकी 114 किलो की दूसरी लिफ्ट खराब हो गई। अब तीसरी लिफ्ट में बिंदिया अगर 116 किलो उठाने का प्रयास नहीं करतीं तो वह पदक से भी चूक सकती थीं लेकिन बिंदिया ने यह लिफ्ट उठाकर रजत जीत लिया। यह बात भी तय थी अगर बिंदिया दूसरी लिफ्ट उठा लेतीं तो वह स्वर्ण जीत सकती थीं। वह नाईजीरिया की एडिजात ओलारिनोये से सिर्फ एक किलो पीछे रह गईं। एडिजात ने 203 और बिंदिया ने कुल 202 किलो वजन उठाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

यह पदक परिवार के दुख दूर करेगा
बिंदिया को स्वर्ण खोने का दुख है लेकिन इस बात की खुशी है कि उन्हें राष्ट्रमंडल खेल का पदक तो मिला है। यह पदक उनके परिवार के दुख करेगा। बिंदिया की मां ने उन्हें पालने के लिए सब्जी बेची। बिंदिया कहती हैं कि वह मां को बोल कर आई थीं कि बर्मिंघम जा रही हूं और अब उनके दुर्दिन दूर होने वाले हैं। वह अब उन्हें सब्जी नहीं बेचने देंगी। बिंदिया कहती हैं कि मां की तबीयत ठीक नहीं रहती है। वह उनका प्रदर्शन देखने के लिए रात भर नहीं सोईं और सुबह से खुशी के कारण रो रही हैं।
विज्ञापन

पदक और नौकरी दोनों की एक साथ मिली खुशी
बिंदिया कहती हैं कि यह पदक उनके लिए दोहरी खुशी लेकर आया है। यहां आने से पहले वह गुवहाटी रेलवे में ज्वाइन करके आई हैं। कोच विजय शर्मा ने उन्हें ज्वाइनिंग करवाई है। अभी उन्हें यह नहीं मालूम है कि उन्हें किस पद पर काम करना है लेकिन नौकरी होने से वह अब अपने परिवार को अच्छी तरह से देख पाएंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed