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पुलेला गोपीचंद बोले, बैडमिंटन में 30 साल गुजारने के बाद भी मैं बहुत कुछ नहीं जानता
amarujala.com: presented by-शरद मिश्र
Updated Sun, 12 Nov 2017 04:52 PM IST
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pullela gopichand
- फोटो : getty images
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बैडमिंटन गुरु के नाम से प्रसिद्ध पुलेला गोपीचंद ने कहा है कि उनको बैडमिंटन के क्षेत्र में करीब 30 साल हो गए हैं लेकिन वह अभी इस खेल के बारे में बहुत कुछ नहीं जानते। बैडमिंटन के नेशनल कोच पुलेला गोपीचंद ने कहा कि उनका बैडमिंटन में आना एक तरह से एक्सीडेंट है। देश को 2 महिला स्टार बैडमिंटन प्लेयर देने वाले गोपीचंद ने कहा कि वह दरअसल क्रिकेट या टेनिस में जाना चाहते थे। लेकिन उस दौरान इन दोनों खेलों में एडमिशन नहीं हो रहे थे। जबकि कोई भी बैडमिंटन में नहीं जाना चाहता था। लिहाजा मुझे इस खेल में प्रवेश मिला।
टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में पुलेला गोपीचंद ने कहा कि 2004 में जब मैंने कोचिंग शुरू की तो सबसे पहले बेस्ट टैलेंट को परखना और उसे बेहतर करना मुख्य लक्ष्य था। इस दौरान एक बच्ची आई और मुझसे पूछी कि शटल को कैसे पकड़ना है। तब मुझे आभास हुआ कि हम अपने बच्चों को पढ़ाने और उन्हें हाईटेक बनाने में मानवीय संवेदना खो रहे हैं।
गोपीचंद कहते हैं कि श्रेष्ठता सिर्फ पढ़ाई की वजह से नहीं आती बल्कि यह सभी बच्चों में होती है। अहम यह है कि मैं उसैन बोल्ट के खिलाफ दौड़ लगाऊं और हरा दूं। मायने यह है कि मेरी प्रतियोगिता खुद से हो और पिछली बार की अपेक्षा मैं और बेहतर करने के लिए लालायित रहूं।
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टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में पुलेला गोपीचंद ने कहा कि 2004 में जब मैंने कोचिंग शुरू की तो सबसे पहले बेस्ट टैलेंट को परखना और उसे बेहतर करना मुख्य लक्ष्य था। इस दौरान एक बच्ची आई और मुझसे पूछी कि शटल को कैसे पकड़ना है। तब मुझे आभास हुआ कि हम अपने बच्चों को पढ़ाने और उन्हें हाईटेक बनाने में मानवीय संवेदना खो रहे हैं।
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गोपीचंद कहते हैं कि श्रेष्ठता सिर्फ पढ़ाई की वजह से नहीं आती बल्कि यह सभी बच्चों में होती है। अहम यह है कि मैं उसैन बोल्ट के खिलाफ दौड़ लगाऊं और हरा दूं। मायने यह है कि मेरी प्रतियोगिता खुद से हो और पिछली बार की अपेक्षा मैं और बेहतर करने के लिए लालायित रहूं।
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