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सुजीत कलकल की कहानी: पिता से सीखा दांव-पेच, फिर मैट पर लिखी कामयाबी की दास्तां, अब एशियन गेम्स में जीता स्वर्ण
Fri, 02 Oct 2026 04:08 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Fri, 02 Oct 2026 04:08 PM IST
सार
हरियाणा के पहलवान सुजीत कलकल ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों के 65 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग का स्वर्ण पदक जीत लिया। फाइनल में एक समय 6-9 से पीछे चल रहे सुजीत ने आखिरी पलों में शानदार वापसी करते हुए मुकाबला 10-9 से अपने नाम किया।
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सुजीत कलकल
- फोटो : IANS
विस्तार
भारत के युवा पहलवान सुजीत कलकल ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों के 65 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती वर्ग का स्वर्ण पदक जीत लिया है। फाइनल में सुजीत ने ताजिकिस्तान के पहलवान के खिलाफ जबरदस्त वापसी करते हुए 10-9 से मुकाबला अपने नाम किया। एक समय भारतीय पहलवान 6-9 से पीछे चल रहे थे, लेकिन आखिरी पलों में उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को दो बार उठाकर मैट पर पटका और लगातार अंक जुटाते हुए मुकाबला पलट दिया। सुजीत की यह जीत सिर्फ एक गोल्ड मेडल नहीं, बल्कि उनके लंबे संघर्ष और मेहनत की कहानी का एक और बड़ा अध्याय है।
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सुजीत कलकल
- फोटो : IANS
हरियाणा के छोटे से गांव से एशियाड के पोडियम तक
5 नवंबर 2002 को हरियाणा के चरखी दादरी जिले के इमलोटा गांव में जन्मे सुजीत कलकल ने कुश्ती के गुर अपने घर से ही सीखे। उनके पिता दयानंद कलकल उनके कोच भी हैं। पिता के मार्गदर्शन में सुजीत ने अपनी ताकत, तकनीक और मैट पर मूवमेंट को लगातार बेहतर किया। 65 किग्रा वर्ग में सुजीत को भारत के उभरते हुए पहलवानों में गिना जाने लगा। उनकी पहचान मजबूत डिफेंस और मौके के हिसाब से काउंटर अटैक करने वाले पहलवान के रूप में बनी। अब एशियन गेम्स के स्वर्ण ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी है।
5 नवंबर 2002 को हरियाणा के चरखी दादरी जिले के इमलोटा गांव में जन्मे सुजीत कलकल ने कुश्ती के गुर अपने घर से ही सीखे। उनके पिता दयानंद कलकल उनके कोच भी हैं। पिता के मार्गदर्शन में सुजीत ने अपनी ताकत, तकनीक और मैट पर मूवमेंट को लगातार बेहतर किया। 65 किग्रा वर्ग में सुजीत को भारत के उभरते हुए पहलवानों में गिना जाने लगा। उनकी पहचान मजबूत डिफेंस और मौके के हिसाब से काउंटर अटैक करने वाले पहलवान के रूप में बनी। अब एशियन गेम्स के स्वर्ण ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी है।
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सुजीत कलकल
- फोटो : IANS
2022 में पहली बड़ी कामयाबी
सुजीत ने कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी। 2022 में उन्होंने 65 किग्रा वर्ग में यू23 एशियन चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीता। यह उनके करियर की शुरुआती बड़ी उपलब्धियों में से एक थी। इसी प्रदर्शन के बाद 65 किग्रा वर्ग में उनसे उम्मीदें बढ़ने लगीं।
सुजीत ने कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी। 2022 में उन्होंने 65 किग्रा वर्ग में यू23 एशियन चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीता। यह उनके करियर की शुरुआती बड़ी उपलब्धियों में से एक थी। इसी प्रदर्शन के बाद 65 किग्रा वर्ग में उनसे उम्मीदें बढ़ने लगीं।
सुजीत कलकल
- फोटो : IANS
70 किग्रा में भी आजमाया हाथ
सुजीत ने सिर्फ 65 किग्रा वर्ग तक खुद को सीमित नहीं रखा। 2024 यू23 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में उन्होंने 70 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता। वजन वर्ग बदलने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना उनकी क्षमता को दिखाता है। इसके बाद उन्होंने फिर 65 किग्रा वर्ग पर अपना ध्यान केंद्रित किया।
सुजीत ने सिर्फ 65 किग्रा वर्ग तक खुद को सीमित नहीं रखा। 2024 यू23 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में उन्होंने 70 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता। वजन वर्ग बदलने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना उनकी क्षमता को दिखाता है। इसके बाद उन्होंने फिर 65 किग्रा वर्ग पर अपना ध्यान केंद्रित किया।
सुजीत कलकल
- फोटो : IANS
ट्रायल से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों तक संघर्ष
सुजीत का सफर सिर्फ पदकों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने भारत में 65 किग्रा वर्ग में जगह बनाने के लिए कड़े मुकाबलों और ट्रायल का सामना किया। 2025 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के चयन ट्रायल में उन्होंने अपने काउंटर अटैकिंग खेल का प्रदर्शन किया। लखनऊ में हुए ट्रायल में उन्होंने अनुज को 10-0 और विशाल कालीरमन को 8-4 से हराकर अपनी जगह मजबूत की थी। इससे पहले 2023 वर्ल्ड रैंकिंग सीरीज में भी सुजीत ने अमेरिका के जॉन माइकल डायकोमिहालिस को 8-2 से हराकर अपनी क्षमता दिखाई थी।
सुजीत का सफर सिर्फ पदकों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने भारत में 65 किग्रा वर्ग में जगह बनाने के लिए कड़े मुकाबलों और ट्रायल का सामना किया। 2025 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के चयन ट्रायल में उन्होंने अपने काउंटर अटैकिंग खेल का प्रदर्शन किया। लखनऊ में हुए ट्रायल में उन्होंने अनुज को 10-0 और विशाल कालीरमन को 8-4 से हराकर अपनी जगह मजबूत की थी। इससे पहले 2023 वर्ल्ड रैंकिंग सीरीज में भी सुजीत ने अमेरिका के जॉन माइकल डायकोमिहालिस को 8-2 से हराकर अपनी क्षमता दिखाई थी।
सुजीत कलकल
- फोटो : IANS
पिता बने कोच, बेटे ने मैट पर किया नाम रोशन
सुजीत की कहानी का एक खास पहलू उनके पिता दयानंद कलकल का उनके करियर में योगदान है। पिता ने उन्हें बचपन से ही कुश्ती की बारीकियां सिखाईं और उनकी ट्रेनिंग पर काम किया। सुजीत ने अपनी ताकत के साथ तकनीकी खेल पर भी लगातार मेहनत की। मैट पर उनकी रक्षात्मक शैली और सही समय पर काउंटर अटैक करने की क्षमता उनकी पहचान बनी। एशियन गेम्स के फाइनल में भी यही अंदाज देखने को मिला। जब मुकाबला उनके हाथ से निकलता हुआ नजर आ रहा था और वह 6-9 से पीछे थे, तब उन्होंने आखिरी पलों में जोखिम उठाया। प्रतिद्वंद्वी को दो बार उठाकर मैट पर पटकने वाले दांव ने मुकाबले का रुख बदल दिया और सुजीत ने 10-9 से जीत दर्ज कर ली।
सुजीत की कहानी का एक खास पहलू उनके पिता दयानंद कलकल का उनके करियर में योगदान है। पिता ने उन्हें बचपन से ही कुश्ती की बारीकियां सिखाईं और उनकी ट्रेनिंग पर काम किया। सुजीत ने अपनी ताकत के साथ तकनीकी खेल पर भी लगातार मेहनत की। मैट पर उनकी रक्षात्मक शैली और सही समय पर काउंटर अटैक करने की क्षमता उनकी पहचान बनी। एशियन गेम्स के फाइनल में भी यही अंदाज देखने को मिला। जब मुकाबला उनके हाथ से निकलता हुआ नजर आ रहा था और वह 6-9 से पीछे थे, तब उन्होंने आखिरी पलों में जोखिम उठाया। प्रतिद्वंद्वी को दो बार उठाकर मैट पर पटकने वाले दांव ने मुकाबले का रुख बदल दिया और सुजीत ने 10-9 से जीत दर्ज कर ली।
सुजीत कलकल
- फोटो : IANS
एशियाड गोल्ड के साथ करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि
एशियन गेम्स 2026 का स्वर्ण सुजीत के करियर का एक बेहद खास पड़ाव है। यू23 एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड और यू23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज जीतने के बाद अब उन्होंने सीनियर स्तर पर भी अपनी क्षमता साबित कर दी है। 21 साल की उम्र में एशियाड चैंपियन बनने वाले सुजीत ने हरियाणा के इमलोटा गांव से निकलकर एशियन गेम्स के पोडियम तक का सफर तय किया है। उनकी कहानी बताती है कि कुश्ती में सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि सही समय पर सही दांव और आखिरी सेकंड तक हार न मानने का जज्बा भी जीत दिलाता है।
एशियन गेम्स 2026 का स्वर्ण सुजीत के करियर का एक बेहद खास पड़ाव है। यू23 एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड और यू23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज जीतने के बाद अब उन्होंने सीनियर स्तर पर भी अपनी क्षमता साबित कर दी है। 21 साल की उम्र में एशियाड चैंपियन बनने वाले सुजीत ने हरियाणा के इमलोटा गांव से निकलकर एशियन गेम्स के पोडियम तक का सफर तय किया है। उनकी कहानी बताती है कि कुश्ती में सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि सही समय पर सही दांव और आखिरी सेकंड तक हार न मानने का जज्बा भी जीत दिलाता है।