{"_id":"6abbc9923638f8ded10f8ab0","slug":"asian-games-2026-gulveer-singh-completes-historic-medal-treble-says-wanted-national-anthem-to-be-played-2026-09-29","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एशियन गेम्स 2026: तीन पदक जीतने के बाद भी गुलवीर सिंह क्यों हैं नाखुश? खुद बताया क्या रह गया अधूरा","category":{"title":"Sports","title_hn":"खेल","slug":"sports"}}
एशियन गेम्स 2026: तीन पदक जीतने के बाद भी गुलवीर सिंह क्यों हैं नाखुश? खुद बताया क्या रह गया अधूरा
Tue, 29 Sep 2026 08:00 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Tue, 29 Sep 2026 08:00 PM IST
सार
गुलवीर सिंह ने एशियन गेम्स 2026 में 5000 मीटर का कांस्य जीतकर तीन पदक अपने नाम किए और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। हालांकि, वह अपने प्रदर्शन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि उनका लक्ष्य स्वर्ण पदक और पोडियम पर राष्ट्रगान सुनना था। 10,000 मीटर और 1500 मीटर में रजत जीत चुके गुलवीर ने कहा कि वह आगे और कड़ी मेहनत कर अगले लक्ष्य पर ध्यान देंगे।
विज्ञापन
गुलवीर सिंह
- फोटो : IANS
विस्तार
भारत के गुलवीर सिंह ने एशियन गेम्स 2026 में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए तीन पदक अपने नाम किए, लेकिन इसके बावजूद वह अपने अभियान से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। मंगलवार को पुरुष 5000 मीटर में कांस्य पदक जीतने के बाद गुलवीर ने कहा कि उनका सपना पोडियम पर खड़े होकर भारत का राष्ट्रगान सुनने का था, जो पूरा नहीं हो सका। गुलवीर ने मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में 5000 मीटर फाइनल में 13:32.75 के समय के साथ कांस्य पदक जीता। इससे पहले उन्होंने 10,000 मीटर और 1500 मीटर में रजत पदक हासिल किया था। इसके साथ ही वह एक ही एशियन गेम्स में तीन पदक जीतने वाले पिछले 40 वर्षों में पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं।
विज्ञापन
'राष्ट्रगान बजते देखना मेरा सपना था'
27 वर्षीय गुलवीर ने अपने प्रदर्शन के बाद प्रसारक से कहा, 'मैं संतुष्ट नहीं हूं क्योंकि मैं यहां इस सोच के साथ आया था कि मेरा राष्ट्रगान बजेगा। मेरा एकमात्र सपना था कि मैं पोडियम पर खड़ा रहूं और राष्ट्रगान बजे। ऐसा नहीं हो सका। अगली बार देखेंगे और और भी कड़ी मेहनत करके वापस आएंगे।' 5000 मीटर में बहरीन के बिरहानु बालेव ने 13:30.79 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि जापान के यामागुची तोमोनोरी ने 13:31.43 के साथ रजत पदक हासिल किया।
27 वर्षीय गुलवीर ने अपने प्रदर्शन के बाद प्रसारक से कहा, 'मैं संतुष्ट नहीं हूं क्योंकि मैं यहां इस सोच के साथ आया था कि मेरा राष्ट्रगान बजेगा। मेरा एकमात्र सपना था कि मैं पोडियम पर खड़ा रहूं और राष्ट्रगान बजे। ऐसा नहीं हो सका। अगली बार देखेंगे और और भी कड़ी मेहनत करके वापस आएंगे।' 5000 मीटर में बहरीन के बिरहानु बालेव ने 13:30.79 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि जापान के यामागुची तोमोनोरी ने 13:31.43 के साथ रजत पदक हासिल किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
10 हजार और 1500 मीटर में भी जीते रजत
गुलवीर ने इससे पहले 10,000 मीटर में 28:29.38 के समय के साथ रजत पदक जीता था। इस प्रदर्शन के साथ वह पुरुष 10,000 मीटर में दो एशियन गेम्स पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने 2023 हांगझोउ एशियन गेम्स में इसी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद गुलवीर ने 1500 मीटर में भी रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने 3:36.72 का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय निकाला। जापान के काजुतो इइजावा ने 3:36.35 के एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण और उनके हमवतन नागिया मोरी ने कांस्य पदक जीता।
गुलवीर ने इससे पहले 10,000 मीटर में 28:29.38 के समय के साथ रजत पदक जीता था। इस प्रदर्शन के साथ वह पुरुष 10,000 मीटर में दो एशियन गेम्स पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने 2023 हांगझोउ एशियन गेम्स में इसी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद गुलवीर ने 1500 मीटर में भी रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने 3:36.72 का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय निकाला। जापान के काजुतो इइजावा ने 3:36.35 के एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण और उनके हमवतन नागिया मोरी ने कांस्य पदक जीता।
एएफआई के समर्थन और ट्रेनिंग को दिया श्रेय
नागोया के मुश्किल मौसम के बावजूद गुलवीर ने कहा कि उनकी तैयारी और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) से मिले समर्थन ने काफी मदद की। उन्होंने बताया कि विश्व क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप से पहले एएफआई ने उन्हें लगातार ट्रेनिंग जारी रखने के लिए अमेरिका में रहने की सलाह दी थी। गुलवीर ने कहा कि करीब एक महीने के लिए भारत लौटने के बाद वह दोबारा अमेरिका जाकर ट्रेनिंग करने लगे। उनके मुताबिक इस निरंतर ट्रेनिंग और एएफआई के समर्थन से उन्हें काफी फायदा मिला।
नागोया के मुश्किल मौसम के बावजूद गुलवीर ने कहा कि उनकी तैयारी और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) से मिले समर्थन ने काफी मदद की। उन्होंने बताया कि विश्व क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप से पहले एएफआई ने उन्हें लगातार ट्रेनिंग जारी रखने के लिए अमेरिका में रहने की सलाह दी थी। गुलवीर ने कहा कि करीब एक महीने के लिए भारत लौटने के बाद वह दोबारा अमेरिका जाकर ट्रेनिंग करने लगे। उनके मुताबिक इस निरंतर ट्रेनिंग और एएफआई के समर्थन से उन्हें काफी फायदा मिला।
सेना में भर्ती की तैयारी से शुरू हुआ सफर
गुलवीर ने बताया कि एथलेटिक्स में उनका शुरुआती सफर अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने के सपने से नहीं, बल्कि सेना में भर्ती की तैयारी से शुरू हुआ था। उन्होंने कहा, 'मैं भर्ती की तैयारी कर रहा था। मुझे एथलेटिक्स के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। फिर मैं सेना में शामिल हुआ और उसके बाद चीजें आगे बढ़ती गईं।' तीन पदक जीतने के बाद भी गुलवीर अब पीछे मुड़कर देखने के बजाय आगे की चुनौतियों पर ध्यान देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जो हो गया, उसे पीछे छोड़कर अब अगली सीढ़ी चढ़ने के बारे में सोचना होगा।
गुलवीर ने बताया कि एथलेटिक्स में उनका शुरुआती सफर अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने के सपने से नहीं, बल्कि सेना में भर्ती की तैयारी से शुरू हुआ था। उन्होंने कहा, 'मैं भर्ती की तैयारी कर रहा था। मुझे एथलेटिक्स के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। फिर मैं सेना में शामिल हुआ और उसके बाद चीजें आगे बढ़ती गईं।' तीन पदक जीतने के बाद भी गुलवीर अब पीछे मुड़कर देखने के बजाय आगे की चुनौतियों पर ध्यान देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जो हो गया, उसे पीछे छोड़कर अब अगली सीढ़ी चढ़ने के बारे में सोचना होगा।
युवा खिलाड़ियों को दी डाइट और अनुशासन की सलाह
गुलवीर ने युवा एथलीटों को सही डाइट लेने, कड़ी मेहनत करने और कोच की सलाह का पालन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को किसी भी चीज का सेवन करने से पहले उसके बारे में अच्छी तरह जांच करनी चाहिए और कोच से सलाह लेनी चाहिए। गुलवीर ने अपने परिवार, कोच, स्पोर्ट्स साइंस टीम और एएफआई को भी अपनी सफलता का श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि उनके तीन पदकों से सबसे ज्यादा खुशी उनके माता-पिता और पूरे परिवार को होगी।
गुलवीर ने युवा एथलीटों को सही डाइट लेने, कड़ी मेहनत करने और कोच की सलाह का पालन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को किसी भी चीज का सेवन करने से पहले उसके बारे में अच्छी तरह जांच करनी चाहिए और कोच से सलाह लेनी चाहिए। गुलवीर ने अपने परिवार, कोच, स्पोर्ट्स साइंस टीम और एएफआई को भी अपनी सफलता का श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि उनके तीन पदकों से सबसे ज्यादा खुशी उनके माता-पिता और पूरे परिवार को होगी।