आनंद को हरा कार्लसन फिर बने वर्ल्ड चैंपियन
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तो क्या अब आनंद युग खत्म हो चुका है। गैरी कास्परोव और व्लादिमिर क्रैमनिक जैसे शतरंज के शहंशाहों को दिमागी कसरत के इस नायाब खेल में शह और मात देने वाले विश्वनाथन आनंद की चालें और चतुराई अब अबूझ नहीं रही गईं हैं।
भारतीय दिग्गज आनंद को एक बार फिर अपनी चालों में उलझाकर नार्वे के मैग्नस कार्लसन ने लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन का तमगा हासिल कर लिया। इससे पहले कार्लसन ने चेन्नई में पिछले साल हुई विश्व चैंपियनशिप में आनंद को मात दी थी।
कार्लसन ने पांच बार के विश्व चैंपियन आनंद को रविवार को खेली गई वर्ल्ड चैंपियनशिप की 11वीं बाजी में मात देकर महानता की ओर एक और कदम बढ़ा दिया। कार्लसन ने यह चैंपियनशिप 6.5 अंक हासिल कर अपने नाम की, जबकि 11 बाजियों के बाद आनंद महज 4.5 अंक ही हासिल कर पाए।
11वीं बाजी में चैंपियन आनंद को दी शिकस्त
कार्लसन पहले ही इस खेल की सर्वाधिक ईएलओ रेटिंग 2863 हासिल कर अपनी बेमिसाल प्रतिभा का परिचय दे चुके हैं। रविवार को काले मोहरो से खेल रहे आनंद के लिए इस चैंपियनशिप में बने रहने के लिए कम से कम ड्रॉ जरूरी था।
बेशक उनकी जगह कोई और होता तो इस मैच में ड्रॉ के इरादे से ही उतरता। मगर आनंद ने बिना अंजाम की परवाह किए इस बाजी में जीत के लिए अपना सब कुछ झोंक दिया। मगर कार्लसन के पास मानो उनकी हर चाल का जवाब था।
शह और मात के इस खेल में पलड़ा कई बार कभी आनंद तो कभी कार्लसन के पाले में झुकता रहा, लेकिन अंतिम बाजी मैग्नस के ही हाथ लगी। 12 बाजियों की इस चैंपियनशिप में कार्लसन ने दूसरी और ग्यारहवीं बाजी जीती, जबकि आनंद के हिस्से में एक जीत आई जो उन्होंने तीसरी बाजी में दर्ज की।
हालांकि पिछली बार की तुलना में आनंद ने इस बार सधा खेल दिखाया और कार्लसन को रक्षात्मक खेल खेलने पर मजबूर किया, लेकिन छठी बाजी में की गई भारी भूल का खामियाजा उन्हें विश्व चैंपियनशिप में एक और हार के साथ भुगतना पड़ा।