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इन रोगों का इलाज योग के जरिए बेहद आसान?

Mon, 15 Sep 2014 01:05 PM IST
Updated Mon, 15 Sep 2014 01:05 PM IST
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yoga benefits in health

योग की शुरूआत आसन से करें या ध्यान से, इससे हम अपने जीवन को नई दिशा दे सकते हैं। इसलिए योगाभ्यास को आदत में शामिल करें। विज्ञान सम्मत है कि योग मावन शरीर को निरोग रख सकता है। पर आमतौर पर लोग योग तब अपनाते हैं जब वे हर चिकित्सा पद्यति को आजमा कर हार चुके होते हैं। जब मरीज योग की शरण में आता है तब भी उसकी नब्बे प्रतिशत बीमारी चालीस दिनों में ठीक हो जाती है।

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इस संदर्भ में मधुमेह के कुछ रोगियों के मामले गौर करने लायक हैं। परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती के जरिए स्थापित बिहार योग विद्यालय ने उड़ीसा के बुरला मेडिकल कालेज के सहयोग से मधुमेह के ऐसे मरीजों पर अनुसंधान किया गया जो चालीस वर्षों से इंसुलिन का इंजेक्शन ले रहे थे। इन मरीजों को चालीस दिनों तक लगातार योगाभ्यास कराया गया। अंतिम दिन उनके खून की जांच करवाई गई तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए थे। मरीजों की बीमारी समाप्त हो चुकी थी। एक दशक से ज्यादा बीत जाने के बावजूद उनमें किसी रोगी ने फिर मधुमेह होने की शिकायत नहीं की।
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जब ऐसी विषम परिस्थिति में पहुंचकर योग अपना काम कर सकता है, तो क्यों न शुरू में ही बीमारी को जड़ से समाप्त कर दें? जीवन में किसी न किसी कारण तनाव रहता ही है। यही तनाव आगे चलकर गंभीर बीमारियों का रूप ले लेता है। तनाव का निराकरण समय रहते करना चाहिए। यह काम योग के जरिए बेहद आसान है। जो व्यक्ति योग का उपयोग अपनी समस्याओं के निदान के लिए ही करते हैं, वे मात्र योगाभ्यासी हैं।

जो निर्दिष्ट लक्ष्यों को पाने का प्रयास करते हैं, वे योग साधक हैं। जो योग के नियम को  दैनिक जीवन मे आत्मसात् करते हैं, उनके लिए योग एक जीवनशैली है। इसी तरह जिनके जीवन में शांति, आनंद सत्य साकार हो उठे, वे असल मायनों में यौगिक संस्कृति के साक्षात् संदेशवाहक हैं। पचास साल पहले योग विद्या का प्रचार नहीं था। लोग इसे साधु-संतों की साधना का एक माध्यम मानते थे।

(बिहार योग विद्यालय के परमाचार्य स्वामी निरंजनानंद सरस्वती के सान्निध्य में 18 से 21 सिंतबर को दिल्ली में योग उत्सव हो रहा है।)
प्रस्तुति – किशोर कुमार

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