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तब कृष्ण के नृत्य की प्रतिध्वनियां सुन सकते हैं: ओशो
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 29 Aug 2013 01:08 PM IST
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कृष्ण जिस चांद के नीचे नाचे हैं, वह चांद तो आज भी है; जिन वृक्षों के नीचे नाचे हैं, उन वृक्षों का होना आज भी है। जिन पहाड़ों के पास नाचे हैं, वे पहाड़ आज भी हैं; जिस धरती पर नाचे हैं, वह धरती भी आज है। कृष्ण से जो बहा होगा उस क्षण में, वह सब इनमें छिपा है और यह सब उसे पी गया है।
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अब ये वैज्ञानिक एक बहुत नई बात करते हैं। वे यह कहते हैं कि व्यक्ति तो विदा हो जाते हैं, लेकिन उनसे छोड़ी गई तरंगें सदा के लिए रह जाती हैं। व्यक्ति तो विदा हो जाते हैं, लेकिन उन्होंने जो जीया, उसके संघात, उसकी वेव्ज, वे सब की सब पूरे अस्तित्व में समा जाती हैं और लीन हो जाती हैं। उस पृथ्वी पर जहां कृष्ण नाचे, उस पृथ्वी पर आज कोई नाचे तो कृष्ण की प्रतिध्वनियां सुनाई देती हैं।
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जहां उन्होंने बांसुरी बजाई, जिन पहाड़ों ने उस बांसुरी को सुना, उन पहाड़ों के पास आज भी कोई बांसुरी बजाए तो प्रतिध्वनि सुनाई पड़ती है। जिस यमुना के तट ने उन्हें देखा और जाना और जिसने उनके स्पर्श को अनुभव किया, उस यमुना के तट पर आज भी नृत्य हो तो व्यक्ति मिट जाता है और वह अव्यक्ति फिर घेर लेता है।
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रास को स्त्री और पु़रुष के बीच विभक्त जो विराट शक्ति है, उसके मिलन, उसकी ओवरफ्लोइंग का प्रतीक मैं मानता हूं। और इस भाषा में अगर हम ले सकें तो आज भी रास का उपयोग है और सदा रहेगा। इधर मैंने निरंतर अनुभव किया है, जो मैं आपसे कहूंगा।
ध्यान के लिए हम बैठते हैं, कई बार मित्रों ने मुझे कहा कि स्त्रियों को अलग कर दें, पुरुषों को अलग कर दें। ये दोनों अलग रहेंगे तो सुविधा होगी।
उनकी सुविधा की दृष्टि नासमझी से भरी हुई है। वे नहीं जानते हैं कि स्त्रियां अगर इकट्ठी कर दी जाएं एक ओर और पुरुष एक ओर इकट्ठे कर दिए जाएं तो यह बिल्कुल सजातीय, एक सी शक्तियां इकट्ठी हो जाती हैं, और इनके बीच जो बहाव की संभावना है वह कम हो जाती है।
लेकिन उन्हें खयाल में नहीं है। तो मेरी समझ तो यही है कि अगर ध्यान हम कर रहे हैं तो स्त्रियां और पुरुष एकदम सम्मिलित और मिले-जुले हों। उन दोनों की समझ के बाहर कुछ घटनाएं घटेंगी, जो उनकी समझ से उसका कोई संबंध भी नहीं है। उन दोनों की मौजूदगी, और अकारण मौजूदगी...कोई आप अपनी पत्नी के पास नहीं खड़े हैं...अकारण मौजूदगी आपके भीतर से कुछ बहने में, प्रकट होने में, निकल जाने में, केथार्सिस में सहयोगी होगी। स्त्री के भीतर से भी कुछ बह जाने में सहयोग मिलेगा।
साभार
ओशा वर्ल्ड फाउंडेशन, नई दिल्ली