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मनुष्य जीवन में तीन चीजें ही करता हैः दाती जी महाराज

Mon, 18 Mar 2013 08:39 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क। Updated Mon, 18 Mar 2013 08:39 AM IST
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three things of human life daati ji maharaj

मनुष्य तीन तरह के दिखाई देते हैं। पहले वे जो हमेशा दूसरों की शिकायत ही करते रहते हैं कि ऐसा नहीं हुआ, वैसा नहीं हुआ, यह होना चाहिए, वह होना चाहिए आदि-आदि। दूसरे वैसे लोग होते हैं जो अनुकूल या प्रतिकूल हर स्थिति में प्रसन्न रहते हैं।

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जो कुछ भी उन्हें उपलब्ध होता है, उसी में संतुष्ट रहते हैं। तीसरे प्रकार के लोग मानो हमेशा दु:खी रहने के लिए ही जीवित रहते हैं, उन्हें हर चीज से दु:ख पहुंचता है। कोई भी व्यक्ति, वस्तु या परस्थिति उन्हें सुखी कर पाने में सक्षम नहीं होते।
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सच कहिए तो लगता है कि इस संसार को उक्त तीनों परिस्थितियों ने ही ढक रखा है और लोग उन्हीं परिस्थितियों के चश्मे से संसार और संसार के रचयिता को देखा करते हैं। वास्तव में यह संसार अरूप परमात्मा का ही साकार रूप है। यह दुनिया  अदृश्य सत्ता की काया और अबोल का बोल है।
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जैसे नदी को पार करने के लिए जल में उतरना पड़ता है। वैसे ही सांसारिक परिस्थितियों की सरिता को पार करने के लिए उसमें उतरना पड़ता है और पार उतरने की युक्ति जानने के लिए गुरु के पास जाना पड़ता है। गुरु से ही परिस्थितियों की ओट में छिपी वास्तविकता का बोध होता है। साकार समस्याओं के मूल में अवस्थित अरूप परमात्मा का साक्षात्कार होता है।

जो मनुष्य गुरु कृपा से प्राप्त युक्ति का इस्तेमाल करता है, वह इस किनारे से उस किनारे तक की यात्रा को सुरक्षित रूप से पार करने में सफल होता है। भवजल से भरी नदी को पार करने का आनंद तैराक योगी को ही मिलता है और नाव में बैठे सामान्य मनुष्य भी गुरु कृपा का सहारा ले सांसारिक समस्याओं के भोगी होते हुए भी उसे पार करने में सफल हो जाते हैं।

किंतु एक नदी का सहज यात्री होता है और दूसरा उस नदी के मध्य से इसलिए गुजरता है कि वह तट पर ठहरे लोगों को बता सके कि उस पार जाने का सरल मार्ग जल तरंगों के बीच से होकर किस तरफ से गया है। जो नाव से नदी पार करते हैं, वे भक्त होते हैं और जो नदी के जल में उतरकर उसे पार कर पहुंचते हैं, वे कर्मयोगी होते हैं।

साधारण मनुष्य जीवन में तीन चीजें ही करता है शिकायत, प्रसन्नता और शोक। वह जीवन में दुख आता है तब शिकायत करता है, विलाप करता है, शोक करता है। जब सुख आता है तो धन्यवाद नहीं करता, कहता है कि यह मेरी विजय है। परमात्मा को इन्हीं चीजों ने ढांप दिया है, इसी वजह से आप परमात्मा से दूर हो गये हैं।

साभारः परमहंस दाती जी महाराज

दाती जी महाराज परिचय

दाती जी महाराज का जन्म 10 जुलाई 1950 को राजस्थान के पाली जिला में अलावास गांव में हुआ। दाती जी महाराज बचपन से ही तीक्ष्ण बुद्घि के स्वामी थे। बाल्यकाल में ही इनका लगाव ईश्वर से हो गया था। इन्होंने संसार में व्याप्त ज्योतिष, ध्यान और शनि संबंधित भ्रांतियों को दूर करने का विचार किया। इनकी विद्या, ज्ञान और कृपा से बहुत से भक्त लाभ प्राप्त कर रहे हैं। दाती जी के तीन प्रमुख सिद्घांत हैं सेवा, सतसंग और सुमिरन।

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