फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Wellness ›   sri sri ravishankar pravachan on moh maya

तब आप खुद को भी ईश्वर समझ सकते हैं: श्री श्री रविशंकर

Wed, 18 Sep 2013 02:28 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 18 Sep 2013 02:28 PM IST
विज्ञापन
sri sri ravishankar pravachan on moh maya

जैसे हमारे चारो ओर वायु है , ठीक वैसे ही पूरा संसार माया के आवरण में है। हर एक व्यक्ति का मन माया के किसी न किसी प्रभाव से ग्रस्त है।

विज्ञापन


पर एक सच्चा भक्त सदैव यही चाहता है कि "हे प्रभु, मेरा मन सदैव आपकी भक्ति में लगा रहे, मेरे मन में आपको छोड़कर कोई और विचार न आए, मैं सदैव आपके विचारों में तल्लीन रहूं। अब प्रश्न यह उठता है कि कैसे हम अपने सीमित मन में परमात्मा की असीम सत्ता को समाहित करें?
विज्ञापन


जैसे एक बड़े हाथी को या विशाल सूरज को हम एक छोटे से दर्पण में पकड़ सकते है, ठीक वैसे ही हमारे मन में सम्पूर्ण दिव्यता को अपने भीतर समाहित कर लेने की क्षमता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसलिए ऐसा कहा जाता है कि अगर तुम्हारा हृदय विशुद्ध है तो तुम स्वयं ईश्वर ही हो। अगर तुम्हारे मन का दर्पण निर्मल और शुद्ध है तो तुम दिव्यता को धारण करने में समर्थ हो। अगर तुम्हारे मन दर्पण पर माया की परत आच्छादित है, तो यह संभव नहीं है।

अत: तुम्हारा मन निर्मल और पवित्र होना चाहिए तब तुम्हारे भीतर पूर्णता प्रस्फुटित होने लगती है। हमारा मन माया का घर नहीं होना चाहिए, अपितु यह ईश्वर का पवित्र मंदिर होना चाहिए। जो मन माया में पूरी तरह से फंसा हुआ है वह अगर ईश्वर को समर्पित हो जाए तो माया के जाल से मुक्त हो सकता है।

साभारः आर्ट ऑफ लिविंग

श्री श्री रविशंकर परिचय

मानवीय मूल्यवादी, शांतिदूत और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर, का जन्म 13 मई 1956 को तमिलनाडु के पापानासम में हुआ था। इनके पिता आरएसवी रत्नम ने इनकी आध्यात्मिक रुचि को देखते हुए इन्हें महर्षि महेश योगी के सान्निध्य में भेज दिया।

महर्षि के अनेकों शिष्यों में से रवि उनके सबसे प्रिय थे। 1982 में रवि शंकर दस दिन के मौन में चले गए। कुछ लोगों का मानना है कि इस दौरान वे परम ज्ञाता हो गए और उन्होंने सुदर्शन क्रिया (श्वास लेने की तकनीक) की खोज की।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स, परामनोविज्ञान समाचार, स्वास्थ्य संबंधी योग समाचार, सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed