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ध्यान से हर पल को जी भर जीना सीखें
श्री श्री रविशंकर/अध्यात्मिक गुरु
Updated Tue, 12 Nov 2013 04:20 PM IST
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जब सत्व की वृद्घि होती है तो सजगता, ज्ञान, बुद्घि, प्रसन्नता, आनंद, समता, शांतता इन सब की जीवन में वृद्घि होती है। जब रजस की वृद्घि होती है तो अशांतता, इच्छा और तृष्णा की शुरुआत होती है।
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यह कुछ हद तक अपने साथ दु:ख को भी लाती है। जब तमो गुण बढ़ता है तो उदासी, निद्रा, आलस, निरुत्साह आता है।
जीवन में यह तीन गुण चलते रहते हैं। एक ही दिन में कुछ समय आप महसूस करते हैं कि सत्व गुण बढ़ गया है या किसी प्रहर में तमो गुण और किसी समय में रजो गुण बढ़ गया है।
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जब आप ध्यान में बैठे हैं तो कुछ क्षण सत्व गुण के आएंगे और आप बहुत अच्छा महसूस करेंगे।
और कुछ ही क्षणों उपरांत रजो गुण या तमो गुण आ जाएगा और आप अपनी ऊर्जा में बदलाव महसूस करेंगे। इसका उल्टा भी हो सकता है।
कभी-कभी तमो गुण आ जाता है और जब आप उससे निकल जाते हैं तो सत्व गुण बढ़ जाता है। फिर आप अच्छा महसूस करते हैं।
ज्ञानी व्यक्ति इसके कारण लड़खड़ाता नहीं है। वह अपने आपको उनसे परे देखता है। वह यह भी जानता है इनमें से किसी गुण की उपस्थिति उसके मन की अवस्था पर प्रभाव डालेगी इसलिए उसे अपने मन को धोना है।
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स्वयं में इस शुद्ध अस्तित्व की समझ को विकसित करने के लिये यह आवश्यक है कि हम अपने मन का स्नान करवाएं।
जैसे हम अपने शरीर को स्नान देते हैं,या वस्त्र गंदे होते हैं तो उन्हें फिर से धोते हैं, हमारा मन इसी के समान हैं। जैसे आपको अपनी स्वच्छता बरकरार रखने के लिये निरंतर स्नान करना पड़ता है, आपको अपने मन को भी स्नान देना चाहिए।
कोई यह नहीं कहता कि वे सिर्फ तभी स्नान करेंगे जब वहां अस्वच्छता है। कोई भी बार-बार यह नहीं सोचेगा कि उसे स्नान करना है कि नहीं। हमारा शरीर स्वच्छ या अस्वच्छ है, फिर भी हम प्रतिदिन स्नान करते हैं।
यदि आपके हाथ में मिट्टी लग गई है और तो क्या आप बैठकर रोने लगते हैं? नहीं। आप तुरंत जाकर साबुन लगाकर अपना हाथ साफ कर लेते हो।
यदि गंद काफी कठोर है और आसानी से नहीं निकल रहा है तो आप घिसकर हाथ को साफ करते रहेंगे।
उसी तरह हमें निरंतर हमारे मन की गदंगी को साफ करने की आवश्यकता होती है। मन उसी तरह से बना हुआ होता है। यहां पर ध्यान मदद करता है। वह मन को स्वच्छ रखने में सहायक है।
मन में हर समय खुशी और उदासी आती रहती है और वह उत्पन्न होते हुए चली भी जाती है।
थोड़ी देर बैठ जाए और कुछ समय के लिए ध्यान, प्राणायाम, भजन और प्रार्थना करें। अब मन पर ध्यान दें तो आप यह पाएंगे कि वह धुल गया है और फिर से स्वच्छ हो गया है।
ध्यान के द्वारा भूतकाल के सारे क्रोध और पूर्व की घटनाओं से निकला जा सकता है। ध्यान यानि वर्तमान क्षण को स्वीकार करना और हर क्षण को गहराई के साथ पूरी तरह जीना।