फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Wellness ›   shradh near ganga river

गंगा किनारे श्राद्घ, तर्पण और अंतिम संस्कार की चाहत क्यों?

Thu, 26 Sep 2013 03:30 PM IST
टीम डिजिटल
टीम डिजिटल Updated Thu, 26 Sep 2013 03:30 PM IST
विज्ञापन
shradh near ganga river

बहुत से लोगों की चाहत रहती है कि अंतिम सांस गंगा तट पर लें। इसलिए वृद्घावस्था में गंगा तट पर घर बनाकर रहने लगते हैं। अगर ऐसा संभव नहीं हो पाता है तो अपने बच्चों से यही उम्मीद लगाए रखते हैं कि अंतिम संस्कार गंगा किनारे हो या उनकी अस्थियां गंगा में विसर्जित की जाए।

विज्ञापन


माना जाता है कि गंगा में अस्थियां विसर्जित करने से एवं गंगा किनारे प्राण त्याग करने से यमलोक में प्राप्त होने वाले कष्टों से मुक्ति मिलती है और स्वर्ग में स्थान मिलता है। इस मान्यता का कारण यह है कि शास्त्रों में गंगा को स्वर्ग की नदी कहा गया है। गंगा को त्रिपथगा भी कहते हैं क्योंकि गंगा एक मात्र नदी है जो तीनों लोको यानी स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल में भी बहती है।
विज्ञापन


कपिल मुनि के शाप के कारण भष्म हुए राजा सगर के पुत्रों को मुक्ति दिलाने के लिए राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या की थी। इससे गंगा को पृथ्वी पर आना पड़ा था। गंगा के स्पर्श मात्र से सगर के पुत्र पाप और शाप मुक्त होकर स्वर्ग चले गए। महाभारत में भी गंगा को मुक्ति दायिनी बताया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


राजा वशिष्ठ के शाप से मुक्ति पाने के लिए सातों वसुओं ने गंगा से प्रार्थना की। गंगा ने राजा शांतनु से विवाह करके सातों वसुओं को जन्म दिया और अपनी जल धार में बहा दिया जिससे उन्हें मुक्ति मिल गई। इसलिए व्यक्ति यही चाहता है कि गंगा का स्पर्श प्राप्त करके उसे भी मुक्ति मिल जाए। इसलिए गंगा के किनारे श्राद्घ, तर्पण एवं अंतिम संस्कार के लोग श्रद्घालु जुटते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स, परामनोविज्ञान समाचार, स्वास्थ्य संबंधी योग समाचार, सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed