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रामायण और जीवन मंत्र: सुखी जीवन जीने के लिए रामायण से सीखें यह 5 बातें
Tue, 07 Apr 2020 10:41 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 07 Apr 2020 10:41 AM IST
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रामायण
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पूरा देश इस समय लॉकडाउन के दौर से गुजर रहा है। अपने-अपने घरों में रहकर ही दुनिया में फैले कोरोना वायरस को परास्त किया जा सकता है। ऐसे में दूरदर्शन पर एक बार फिर रामायण का प्रसारण किया जा रहा है। पूरे देश के लोग परिवार संग एक साथ बैठकर रामायण देख रहे हैं। रामायण हिंदूओं का एक प्रमुख पवित्र ग्रंथ है। जिसमें अनुशासन, मर्यादा, कर्तव्य और बुराईओं को कैसे परस्त किया जा सकता है इन सब बातों को विस्तार से बताया गया है।
रामायण के हर एक प्रसंग में कुछ न कुछ ऐसी बातें जरूर है जिसे देखकर और सीखकर अपने जीवन में जरूर पालन करना चाहिए। रामायण की सीख से तमाम तरह तनाव और परेशानियों से बचा जा सकता है।
रामायण और जीवन मंत्र
1- मर्यादा और अनुशासन
अनुशासन और मर्यादा किसी भी मनुष्य का सबसे अच्छा गुण माना गया है। भगवान राम का व्यक्तित्व मर्यादित और अनुशासन से पूर्ण रहा है। भगवान राम ने अपनी मर्यादाओं और अनुशासन में रहकर जीवन की हर एक जिम्मेदारी का बखूबी निर्वाहन किया है। भगवान राम के इन्हीं दो गुणों को अपने जीवन में उतार कर हम एक अच्छे इंसान बनकर सुख जीवन जी सकते है।
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2- दया और प्रेम का भाव
दयावान बनना और सभी के साथ प्रेम भाव रखना रामायण जैसे महाग्रंथ से सीखा जा सकता है। भगवान राम ने एक साथ कई रिश्तों को दया और प्रेम के भाव में रखकर निभाया है। उन्होंने पुत्र, भाई, पति और एक राजा की जिम्मेदारी प्रेम के भाव में निभाई है। व्यक्ति अगर भगवान राम के इन्हीं दो गुणों को अपनाकर चले तो उसके जीवन में हमेशा खुशहाली और संतोष का भाव रहेगा।
3- विविधता में एकता
अगर सामूहिक रूप में मिलकर किसी पर विजय प्राप्त करनी है तो उसमें एकता बहुत जरूरी है। रामायण में विविधता में एकता कैसे होनी चाहिए इसकी बड़ी सीख देती है। रावण को परास्त करने में भगवान राम की सेना में मनुष्य से लेकर जानवरों समेत कई तरह के लोगों का साथ मिला था। राम समेत चारों भाइयों का अलग-अलग चरित्र होने के बावजूद सभी में एकता थी। विविधता होने के बावजूद अगर एक साथ मिलकर किसी भी समस्या से लड़ते है तो उस पर विजय जरूर प्राप्त होती है।
4- विश्वास
विश्वास किसी भी रिश्ते की सबसे बड़ी पूंजी होती है। भगवान राम ने 14 वर्षों तक वनवास काटकर कैकई को दिए वचन को निभाया। इन सब के बाद भी भगवान राम का सभी भाइयों से बराबर प्रेम था। जहां राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने 14 साल तक राम के साथ वनवास काटा था तो वहीं भरत ने अयोध्या के राज पाठ को ठुकरा दिया। यह सब विश्वास और रिश्तों की डोर को मजबूती के लिए प्रेरित करती है।
5- एक समान आचरण
भगवान राम के व्यक्तित्व से सभी प्राणियों के प्रति एक समान आचरण रखने की सीख देता है। भगवान राम ने कभी भी भेदभाव के साथ किसी से आचरण नहीं किया। उन्होंने हर जाति, उम्र, लिंग और पद के साथ एक जैसा व्यवहार किया। ऐसे में हमे भगवान राम के समानता के गुण से सीखना चाहिए।
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रामायण के हर एक प्रसंग में कुछ न कुछ ऐसी बातें जरूर है जिसे देखकर और सीखकर अपने जीवन में जरूर पालन करना चाहिए। रामायण की सीख से तमाम तरह तनाव और परेशानियों से बचा जा सकता है।
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रामायण और जीवन मंत्र
1- मर्यादा और अनुशासन
अनुशासन और मर्यादा किसी भी मनुष्य का सबसे अच्छा गुण माना गया है। भगवान राम का व्यक्तित्व मर्यादित और अनुशासन से पूर्ण रहा है। भगवान राम ने अपनी मर्यादाओं और अनुशासन में रहकर जीवन की हर एक जिम्मेदारी का बखूबी निर्वाहन किया है। भगवान राम के इन्हीं दो गुणों को अपने जीवन में उतार कर हम एक अच्छे इंसान बनकर सुख जीवन जी सकते है।
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2- दया और प्रेम का भाव
दयावान बनना और सभी के साथ प्रेम भाव रखना रामायण जैसे महाग्रंथ से सीखा जा सकता है। भगवान राम ने एक साथ कई रिश्तों को दया और प्रेम के भाव में रखकर निभाया है। उन्होंने पुत्र, भाई, पति और एक राजा की जिम्मेदारी प्रेम के भाव में निभाई है। व्यक्ति अगर भगवान राम के इन्हीं दो गुणों को अपनाकर चले तो उसके जीवन में हमेशा खुशहाली और संतोष का भाव रहेगा।
3- विविधता में एकता
अगर सामूहिक रूप में मिलकर किसी पर विजय प्राप्त करनी है तो उसमें एकता बहुत जरूरी है। रामायण में विविधता में एकता कैसे होनी चाहिए इसकी बड़ी सीख देती है। रावण को परास्त करने में भगवान राम की सेना में मनुष्य से लेकर जानवरों समेत कई तरह के लोगों का साथ मिला था। राम समेत चारों भाइयों का अलग-अलग चरित्र होने के बावजूद सभी में एकता थी। विविधता होने के बावजूद अगर एक साथ मिलकर किसी भी समस्या से लड़ते है तो उस पर विजय जरूर प्राप्त होती है।
4- विश्वास
विश्वास किसी भी रिश्ते की सबसे बड़ी पूंजी होती है। भगवान राम ने 14 वर्षों तक वनवास काटकर कैकई को दिए वचन को निभाया। इन सब के बाद भी भगवान राम का सभी भाइयों से बराबर प्रेम था। जहां राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने 14 साल तक राम के साथ वनवास काटा था तो वहीं भरत ने अयोध्या के राज पाठ को ठुकरा दिया। यह सब विश्वास और रिश्तों की डोर को मजबूती के लिए प्रेरित करती है।
5- एक समान आचरण
भगवान राम के व्यक्तित्व से सभी प्राणियों के प्रति एक समान आचरण रखने की सीख देता है। भगवान राम ने कभी भी भेदभाव के साथ किसी से आचरण नहीं किया। उन्होंने हर जाति, उम्र, लिंग और पद के साथ एक जैसा व्यवहार किया। ऐसे में हमे भगवान राम के समानता के गुण से सीखना चाहिए।