सीख: बेरुखी इतनी भी नहीं होनी चाहिए कि पछताने में देर हो जाए
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विकी की जिंदगी में सब कुछ था, पर परिवार के नाम पर सिर्फ उसके पिता थे। पर विकी की कभी अपने पिता से नहीं बनी। उसके पिता एक ऑटो ड्राइवर थे। उन्होंने बड़ी मेहनत से विकी को बड़ा किया। विकी की वकालत चल जाने के बाद उन्होंने ड्राइवरी छोड़ दी और घर की देखभाल करने लगे। पर फिर विकी को उनसे दिक्कत होने लगी। विकी ने फैसला किया कि वह अपने पिता के साथ और नहीं रह सकता। उसने एक अलग घर खरीद लिया। एक दिन विकी अपने एक दोस्त के घर खाने पर गया। वहां दोस्त के पिता भी मिले। उसके पिता ने विकी से पूछा, तुम्हारे पिता जी नहीं आए? विकी ने उन्हें सारी बात बताई और कहा, पंद्रह दिन बाद मैं अपने नए घर में चला जाऊंगा और सारी परेशानियों का अंत हो जाएगा। दोस्त के पिता बोले, बेटा, जरूर जाना। पर वादा करो कि जाने से पहले एक हफ्ता तुम सिर्फ उनके साथ रहोगे। बिना उन्हें दुखी किए। विकी ने सोचा, वैसे भी उसे कुछ दिन छुट्टी लेनी ही है, कहने को तो उनके साथ ही रहेगा।
लिहाजा विकी ने उनसे वायदा कर लिया। अगले दिन से विकी छुट्टी लेकर घर पर रहने लगा और सामान की शिफ्टिंग की तैयारी करने लगा। पहले दिन उसने देखा कि पिता जी कमरे में बैठे किताब पढ़ रहे थे। दूसरे दिन विकी पिता से बात करने गया, तो उसका ध्यान उनकी झुर्रियों पर पड़ा। पिता से बातचीत के बाद विकी को एहसास हुआ कि वर्षों से वह पिता जी को कहीं बाहर नहीं ले गया। मां के देहांत के बाद पिता जी किसी रिश्तेदार के घर भी नहीं गए। उसे ग्लानि होने लगी कि अपने काम में व्यस्त रहने के कारण वह पिता का ध्यान ही नहीं रख पाया। उसने तय कर लिया कि वह पिता जी को अपने नए घर में ले जाएगा। वह तुरंत पिता को इस बारे में बताने और उनसे माफी मांगने उनके कमरे में पहुंचा। पर उसने देखा कि उसके पिता अपनी जिंदगी की सबसे सुखद और कभी न टूटने वाली नींद में सो चुके थे।