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मकर संक्रांति के दिन करें पूर्वजन्म के पापों से मुक्ति के उपाय
जयगोविंद शास्त्री / ज्योतिषशास्त्री
Updated Tue, 12 Jan 2016 07:04 PM IST
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सूर्यदेव के 14 को उत्तरायण की राशि मकर में प्रवेश करने के साथ ही देवताओं के दिन और पितरों की रात्रि का शुभारंभ हो जाएगा। इसके साथ सभी तरह के मांगलिक कार्य, यज्ञोपवीत, शादी-विवाह, गृहप्रवेश आदि आरंभ हो जाएंगे।
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सूर्य का मकर राशि में प्रवेश पृथ्वी वासियों के लिए वरदान की तरह है। कहा जाता है कि सभी देवी-देवता, यक्ष, गंधर्व, नाग, किन्नर आदि इस अवधि के मध्य तीर्थराज प्रयाग में एकत्रित होकर संगम तट पर स्नान करते हैं। श्री तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में लिखा है कि -माघ मकर रबिगत जब होई। तीरथपति आवहिं सब कोई।। देव दनुज किन्नर नर श्रेंणी। सादर मज्जहिं सकल त्रिवेंणी।।
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अर्थात- मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर सभी तीर्थों के राजा प्रयाग के पावन संगमतट पर महीने भर वास करते हुए स्नान ध्यान दान पुण्य करते हैं। वैसे तो प्राणी इस माह में किसी भी तीर्थ, नदी और समुद्र में स्नान कर दान-पुण्य करके त्रिबिध तापों से मुक्ति पा सकता है, लेकिन प्रयाग संगम का फल मोक्ष देने में सक्षम है।
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इस माह अपने पितरों को अर्घ्य देने और श्राद्ध-तर्पण करने से पितृश्राप से भी मुक्ति मिल जाती है। मत्स्य पुराण के अनुसार प्रयाग तीर्थ में आठ हजार श्रेष्ठ धनुर्धारी, माँ गंगा की रक्षा करते हैं। इसी तरह सूर्यदेव पुत्री यमुना की, देवराज इंद्र प्रयाग की, शिव अक्षय वट की और विष्णु मंडल की रक्षा करते हैं।
सूर्य के सहयोग से ही ब्रह्मा जी सृष्टि का सृजन करते हैं। कर्मविपाक संहिता में भी कहा गया है कि ब्रह्मा, विष्णु, शिव, शक्ति, देवता, योगी ऋषि आदि भगवान् सूर्य का ही ध्यान करते हैं। सूर्यदेव केवल जल अर्घ्य देने से ही प्रसन्न हो जाते हैं। जीवात्मा की जन्मकुंडली में भी सूर्य की स्थिति का गंभीरता से विचार किया जाता है। अकेले सूर्य ही बलवान हों तो सात ग्रहों का दोष शमन कर देते हैं।
जो मनुष्य प्रातःकाल स्नान करके सूर्य को अर्घ्य देता है उसे किसी भी प्रकार का ग्रहदोष नहीं लगता। क्योंकि इनकी सहस्रों किरणों में से प्रमुख सातों किरणें सुषुम्णा, हरिकेश, विश्वकर्मा, सूर्य, रश्मि, विष्णु और सर्वबंधु, (जिनका रंग बैगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी और लाल है) हमारे शरीर को नई उर्जा और आत्मबल प्रदान करते हुए हमारे पापों का शमन कर देती हैं।
प्रातःकालीन लाल सूर्य का दर्शन करते हुए ''ॐ सूर्यदेव महाभाग त्र्यलोक्य तिमिरापः मम् पूर्वकृतं पापं क्षम्यतां परमेश्वरः'' यह मंत्र बोलते हुए सूर्य नमस्कार करने से जीव को पूर्वजन्म में किए हुए पापों से मुक्ति मिलती है।