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Mahavir Jayanti 2020: सुखी जीवन जीने के लिए भगवान महावीर के तीन सूत्र और अनमोल वचन
Mon, 06 Apr 2020 12:13 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 06 Apr 2020 12:13 AM IST
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mahavir jayanti 2020
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6 अप्रैल 2020 को भगवान महावीर जयंती की मनाई जाएगी। भगवान महावीर ने सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया। जैन धर्म का समुदाय इस पर्व को बड़ी ही धूम-धाम से एक उत्सव की तरह मनाते हैं। स्वामी महावीर को जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर माना जाता है।
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भगवान महावीर के बचपन का नाम वर्धमान था। इनका जन्म 599 ईसा पूर्व में हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ था। भगवान महावीर नें तीस वर्ष की उम्र में वैभव और विलासिता पूर्ण जीवन को त्याग कर बारह वर्ष की मौन तपस्या के बाद 'केवलज्ञान ' प्राप्त किया था । केवलज्ञान प्राप्त होने के बाद तीस वर्ष तक महावीर ने जनकल्याण हेतु समाज में जमी कुरितियों और अंधविश्वासों की दूर करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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सुखी रहने के लिए भगवान महावीर के सूत्र
- भगवान महावीर हमें स्वयं से लड़ने की प्रेरणा देते हैं। वे कहते हैं- स्वयं से लड़ो, बाहरी दुश्मन से क्या लड़ना? जो प्राणी स्वयं पर विजय प्राप्त कर लेगा उसे सभी सुखों की प्राप्ति होगी।अपने आप पर विजय प्राप्त करना अनेकों शत्रुओं पर विजय पाने से बेहतर है।
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- आपकी आत्मा से परे कोई भी शत्रु नहीं है। असली शत्रु अपने भीतर रहते हैं वे शत्रु हैं- लालच, द्वेष, क्रोध, घमंड ,आसक्ति और नफरत इनसे मनुष्य को सदैव बचना चाहिए।
- मनुष्य के दुखी होने की वजह खुद की गलतियां ही है, जो मनुष्य अपनी गलतियों पर काबू पा सकता है वहीं मनुष्य सच्चे सुख की प्राप्ति भी कर सकता है। कठिन परिस्थितियों में भी मन को विचलित नहीं करना चाहिये।
भगवान महावीर के कुछ अनमोल वचन
- आपकी आत्मा से परे कोई भी शत्रु नहीं है। असली शत्रु अपने भीतर रहते हैं। वे शत्रु हैं- लालच, द्वेष, क्रोध, घमंड और आसक्ति और नफरत।
- मनुष्य के दुखी होने की वजह खुद की गलतिया ही है, जो मनुष्य अपनी गलतियों पर काबू पा सकता है वहीं मनुष्य सच्चे सुख की प्राप्ति भी कर सकता है।
- महावीर हमें स्वयं से लड़ने की प्रेरणा देते हैं। वे कहते हैं- स्वयं से लड़ो, बाहरी दुश्मन से क्या लड़ना? जो स्वयं पर विजय प्राप्त कर लेगा उसे आनंद की प्राप्ति होगी।
- आत्मा अकेले आती है अकेले चली जाती है, न कोई उसका साथ देता है न कोई उसका मित्र बनता है।
- आपात स्थिति में मन को डगमगाना नहीं चाहिये।
- खुद पर विजय प्राप्त करना लाखों शत्रुओं पर विजय पाने से बेहतर है।