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सीख: कुछ नया करने की इच्छा ही मनुष्य को सफल बनाती है
नोलैन बुशनेल
Updated Mon, 18 Jun 2018 11:27 AM IST
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नोलैन बुशनेल
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मैं उटाह के ऑडेन में पैदा हुआ। हाई स्कूल में रहते हुए मैंने वर्षों तक लैगून एम्यूजमेंट पार्क में काम किया। वहां दो सीजन तक गेम्स डिपार्टमेंट में काम करते हुए मुझे बहुत मजा आया और मैंने बहुत कुछ सीखा भी, जो बाद के दिनों में मेरे बहुत काम आया। यूनिवर्सिटी ऑफ उटाह कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली। कॉलेज मेंरहते हुए मैंने लिटल गाइडेंस ऐंड कंट्रोल सिस्टम्स, हेडली लिमिटेड आदि कंपनियों के लिए काम किया।
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स्कूली जीवन के अपने अनुभव को अपने करियर में आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 1972 में मैंने एटेरी की स्थापना की, जिसके जरिये दुनिया में वीडियो गेम इंडस्ट्री की बाकायदा शुरुआत हुई। इससे पूरा परिदृश्य ही बदल गया। स्टीव जॉब्स तब इसके इंजीनियरिंग सेक्शन में काम करते थे। स्टीव जॉब्स ने बाद में मुझसे कुछ कर्ज मांगा था, और उसके बदले एपल में हिस्सेदारी देने की पेशकश की थी, पर मैंने उनका प्रस्ताव खारिज कर दिया था।
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पांच साल बाद 1977 में एटेरी को वार्नर कम्युनिकेशन के हाथों बेचकर मैंने चक ए चीज'स पिज्जा टाइम थियेटर की शुरुआत की। यह एक ऐसा रेस्टोरेंट था, जहां बच्चे पिज्जा खाते
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और वीडियो गेम्स खेलते थे। दरअसल शुरू से ही मैं वॉल्ट डिज्नी के लिए काम करना चाहता था। लेकिन मैं जब भी उनके पास काम के लिए गया, मुझे खारिज कर दिया गया। मेरी यह परियोजना कमोबेश उसी से प्रेरित थी। कुछ साल बाद इसकी जिम्मेदारी किसी और को देकर मैंने कैटलिस्ट टेक्नोलॉजीज पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर लिया। बहुत बाद में मुझे महसूस हुआ कि एटरी से अलग होना मेरा गलत फैसला था। लेकिन आज वीडियो गेम्स जिस तरह हिंसा और पोर्नोग्राफी के पर्याय बन गए हैं, वह मुझे दुखी करता है।
खासकर मैंने जो सोचकर वीडियो गेम की शुरुआत की थी, उसमें ग्रेट थेप्ट ऑटो जैसे गेम की तो कोई जगह ही नहीं होनी चाहिए। मेरा मानना है कि कुछ नया करने की इच्छा ही मनुष्य को सफल बनाती है। इसके अलावा विफलता भी कई बार हमारे काम आती है। अगर वॉल्ट डिजनी के यहां से मुझे खारिज नहीं किया जाता, तो शायद मैं अलग काम नहीं कर पाता।