{"_id":"482751fa-eebc-11e2-b9db-001e671f54a0","slug":"health-tips-of-guru-maa-anandmurti","type":"story","status":"publish","title_hn":"खून में मिलकर जहर न बन जाए हार्मोन: गुरू मां आनंदमूर्ति ","category":{"title":"Wellness","title_hn":"पॉज़िटिव लाइफ़","slug":"wellness"}}
खून में मिलकर जहर न बन जाए हार्मोन: गुरू मां आनंदमूर्ति
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
Updated Wed, 24 Jul 2013 09:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दोनों गुर्दों के ठीक ऊपर ‘ऐड्रिनलीन’ नामक हार्मोन को स्रावित करने वाली उपवृक्क (ऐड्रिनल) ग्रन्थियां होती हैं। यह ऐड्रिनलीन नामक हार्मोन शरीर में होने वाली ‘लड़ो या भागो’ इन दोनों प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण करता है।
विज्ञापन
जब कभी संकट से आमना-सामना होता है, तो क्षण के सौंवे हिस्से से भी कम समय में हाइपोथेलेमस ग्रन्थि पूरे शरीर को ‘लड़ो या भागो’ का सन्देश देकर ख़ुद की रक्षा करने का आदेश देती है।
विज्ञापन
अगर कोई हिंसक जानवर या शत्रु सामने आए, तो तुम भागकर छुटकारा पाने की कोशिश करोगे। यह निसर्गतः ही होगा। वहां तुम अन्य पर्यायों पर विचार करने के लिये रुकोगे नहीं, या रुकोगे? ऐड्रिनल ग्रन्थि से स्रावित होने वाला ऐड्रिनलीन हार्मोन आपको आवश्यक प्रतिक्रिया करने के लिये प्रेरित करता है।
विज्ञापन
यही नियंत्रण प्रकृति ने आपके हाथों में दिया हुआ है। जब आप क्रोधित हो जाते हैं, तब भी ऐड्रिनलीन हार्मोन का स्राव होता है। हालांकि उस समय तो उसकी ज़रूरत ही नहीं होती, क्योंकि तब आपको किसी संकट से भागना नहीं होता है।
पर क्रोध व्यक्ति में सामने वाले को दण्डनीय पीड़ा देने की इच्छा को प्रवृत्त करता है और अगर उसे लगे कि सामने वाला मेरे से ज़्यादा तगड़ा है, तो वह शायद भागना भी चाहेगा। ऐसी स्थिति में भी ऐड्रिनल ग्रन्थि सक्रिय हो कर ऐड्रिनलीन को स्रावित करती है।
मान लो, आप ग़ुस्से में तमतमाते हुए लड़ने के लिये तैयार होकर किसी के घर गये, घर जाकर देखा कि दरवाजे पर ताला लगा है। ऐड्रिनलीन हार्मोन सारे बदन में दौड़ रहा है, सारा बदन तनाव में है, तुम्हारे स्नायु भी तनाव में हैं। उस घर के द्वार पर एक भयंकर अल्सेशियन कुत्ता उग्रता से भौंक रहा है।
ऐसे में तुम्हारी भीतर की आवाज़ तुम्हें भाग जाने के लिये सूचित करती है, अन्यथा वह कुत्ता आपकी बोटियों को फाड़ देगा। तो आप एक शब्द बोले बिना दुम दबाकर घर वापस लौट आते हैं।
अब इस पूरे प्रसंग में जो ऐड्रिनलीन हार्मोन स्रावित होकर तुम्हारे रक्त-प्रवाह में घुल चुका है, उसका क्या करोगे? वह तो अपने घातक परिणाम दिखाएगा ही। तुम ग़ुस्से में तिलमिलाते हुए गए और कुछ कहे बिना वापस आए। परंतु आपका शरीर रक्त में छोड़े गये उस अनावश्यक ऐड्रिनलीन हार्मोन द्वारा होने वाले घातक परिणामों से अपना छुटकारा तो नहीं कर पायेगा न!
इसलिये यह महत्त्वपूर्ण है कि ऐड्रिनल ग्रन्थि का कार्य सामान्य रहे। मानो आप किसी कारणवश बदला नहीं ले पाए, ग़ुस्सा ज़ाहिर नहीं कर पाए और ग़ुस्से को अंदर रख लिया। ऐड्रिनल ग्रन्थि द्वारा जो स्राव रक्त में पहुंच गया होगा, उससे आपके शरीर में एक ऐसा ज़हर बन जाता है, जो स्वयं आपको ही नुकसान पहुंचाता है।
इसलिये यह ज़रूरी है कि एड्रिनल ग्रन्थि की कार्यप्रणाली सही हो। इसके लिये तुम्हें अपने दिमाग को ठण्डा रखना पड़ेगा और योगासन करने होंगे। पश्चिमोत्तानासन, जानुशिरासन, पवन मुक्तासन, शशांकासन, मण्डुकासन, मयूरासन, धनुरासन, सर्पासन और उष्ट्रासन इन सभी आसनों से हमारे नीचले पेट पर दबाव आता है और ऐड्रिनल ग्रन्थि का कार्य सुचारु हो जाता है।