{"_id":"d346da66-2708-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"good-and-evil-walk-hand-in-hand-sri-sri-ravi-shankar","type":"story","status":"publish","title_hn":"अच्छा और बुरा दोनों सापेक्ष हैः श्री श्री रविशंकर","category":{"title":"Wellness","title_hn":"पॉज़िटिव लाइफ़","slug":"wellness"}}
अच्छा और बुरा दोनों सापेक्ष हैः श्री श्री रविशंकर
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
Updated Mon, 05 Nov 2012 02:24 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अच्छा और बुरा दोनों सापेक्ष हैं। आर्ट ऑफ लिविंग का यह पहला सिद्धांत है कि विरोधी मूल्य पूरक होते हैं। दुनिया में कुछ भी पूरी तरह अच्छा और पूरी तरह बुरा नहीं होता।
विज्ञापन
दूध अच्छा है लेकिन कुछ परिस्थितियों में यह हानिकारक भी होता है। इसी तरह जहर खतरनाक है लेकिन कभी-कभी वह जीवनरक्षक हो जाता है। सभी जीवनरक्षक दवाएं जहरीली होती हैं। इसीलिए मैं कहता हूं कि अच्छा और बुरा सापेक्ष स्थितियां हैं। विभेदकारी जागरूकता से ही आप सत्य को पा सकते हैं।
विज्ञापन
जरूरी नहीं कि हर अच्छाई आध्यात्मिक हो। उदाहरण के लिए स्वास्थ्य के नियम हैं। मनुष्य का एक स्वभाव है चीजों को टालना। मस्तिष्क हमेशा अच्छे काम कल के लिए टालता है और बुरे काम तुरंत करना चाहता है।
विज्ञापन
अगर आप अच्छाई को टालते हैं तो फिर वे कभी नहीं होती। जरूरी है कि आप टालू प्रवृत्ति से बचें और संतुलित जीवन जीएं। आध्यात्म और भौतिकता के बीच हमेशा एक संतुलन बने रहना चाहिए। अच्छे जीवन के लिए कठिन परिश्रम ही काफी नहीं है, काम को बेहतर ढंग से किए जाने की भी जरूरत है।
स्वस्थ्य जीवन के लिए मैं बार-बार कहता हूं कि बच्चे बन जाओ। बच्चा प्राकृतिक रूप से निर्दोष होता है, इसीलिए वह ईश्वर के निकट है। जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, हम मैले होने लगते हैं।
श्री श्री रविशंकर
जन्म 13 मई 1956 को तमिलनाडु के पापानासम में हुआ था। इनके पिता आरएसवी रत्नम ने इनकी आध्यात्मिक रुचि को देखते हुए इन्हें महर्षि महेश योगी के सान्निध्य में भेज दिया। महर्षि के अनेकों शिष्यों में से रवि उनके सबसे प्रिय थे। 1982 में रवि शंकर दस दिन के मौन में चले गए।
कुछ लोगों का मानना है कि इस दौरान वे परम ज्ञाता हो गए थे और उन्होंने सुदर्शन क्रिया (श्वास लेने की तकनीक) की खोज की। इसके बाद श्री श्री ने दुनिया भर में सुदर्शन क्रिया के विस्तार के लिए आर्ट ऑफ लिविंग संगठन की स्थापना की।