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तनाव से छूटने के बाद बढ़ती है ऊर्जा
Updated Tue, 07 Aug 2012 03:33 PM IST
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ध्यान करने से मानसिक तनाव दूर होता है। इस बारे में ज्यादा शोध अनुसंधान की जरूरत शायद अब नहीं रही। अब तक हुए सैंकड़ों शोध और अनुसंधान प्रयोगों से यह बात प्रमाणित हुई है और यह भी कि तनाव से मुक्त होने का एहसास किसी जड़ता या संवेदन शून्यता के कारण नहीं बल्कि मानसिक स्थिति में आई निर्मलता के कारण आता है।
ध्यान के प्रभावों से संबंधित कई जानकारियां एक शोध में सामने आई है। वेस्ट वर्जीनिया के ‘कैंसर परमानेंट सेंटर फॉर हेल्थ रिसर्च’ नामक संस्था ने हाल ही में एक सर्वेक्षण किया। इसमें 106 सेकेंडरी स्कूलों के छात्रों को शामिल किया गया था। सर्वे में विभिन्न वर्गों और जातियों या व्यवसायों से जुड़े छात्रों को शामिल किया गया था। जिसमें नस्लीय और जातीय अल्पसंख्यक समुदाय के 87 प्रतिशत छात्र थे।
अध्ययन में पाया गया कि ध्यान करने वाले विद्यार्थियों में मानसिक तनाव 36 फीसदी कम हुआ साथ ही चिंता और अवसाद के लक्षणों में भी कमी देखी गई। इसके अलावा उनकी मानसिक ऊर्जा और कार्य क्षमता में भी इजाफा होता है। ‘चिंता’ नहीं ‘चिंतन’ करें ‘जर्नल ऑफ इंस्ट्रक्शनल साइकोलॉजी’ की रपट के मुताबिक सर्वेक्षण में कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के छात्रों का भावनात्मक स्वास्थ्य अच्छा अथवा औसत से अधिक देखा गया।
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सर्वेक्षण करने वाले और ‘कैंसर परमानेंट सेंटर फॉर हेल्थ रिसर्च’ के शोधकर्ता चार्ल्स एल्डर ने कहा, यह बहुत जरूरी है कि उच्च विद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्रों के अत्यधिक तनाव पर ध्यान दिया जाए। महर्षि प्रबंधन विश्वविद्यालय के एक बयान के अनुसार एल्डर ने कहा, तनाव कम होने से मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
हृदय की बीमारियों के लिए जिम्मेदार कारक उच्च रक्तचाप, मोटापा और मधुमेह के खतरे भी कम हो जाते हैं। महर्षि प्रबंधन विश्वविद्यालय के अनुसार जरूरी नहीं कि ध्यान की कोई निर्धारित तकनीक ही इस्तेमाल की जाए। बीस या इससे कुछ ज्यादा मिनटों तक सुबह के वक्त स्नानादि से निपटने के बाद निश्चल हो कर शांत चित्त बैठने का अभ्यास किया जाए तो नतीजे महसूस किए जा सकते हैं।
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ध्यान के प्रभावों से संबंधित कई जानकारियां एक शोध में सामने आई है। वेस्ट वर्जीनिया के ‘कैंसर परमानेंट सेंटर फॉर हेल्थ रिसर्च’ नामक संस्था ने हाल ही में एक सर्वेक्षण किया। इसमें 106 सेकेंडरी स्कूलों के छात्रों को शामिल किया गया था। सर्वे में विभिन्न वर्गों और जातियों या व्यवसायों से जुड़े छात्रों को शामिल किया गया था। जिसमें नस्लीय और जातीय अल्पसंख्यक समुदाय के 87 प्रतिशत छात्र थे।
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अध्ययन में पाया गया कि ध्यान करने वाले विद्यार्थियों में मानसिक तनाव 36 फीसदी कम हुआ साथ ही चिंता और अवसाद के लक्षणों में भी कमी देखी गई। इसके अलावा उनकी मानसिक ऊर्जा और कार्य क्षमता में भी इजाफा होता है। ‘चिंता’ नहीं ‘चिंतन’ करें ‘जर्नल ऑफ इंस्ट्रक्शनल साइकोलॉजी’ की रपट के मुताबिक सर्वेक्षण में कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के छात्रों का भावनात्मक स्वास्थ्य अच्छा अथवा औसत से अधिक देखा गया।
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सर्वेक्षण करने वाले और ‘कैंसर परमानेंट सेंटर फॉर हेल्थ रिसर्च’ के शोधकर्ता चार्ल्स एल्डर ने कहा, यह बहुत जरूरी है कि उच्च विद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्रों के अत्यधिक तनाव पर ध्यान दिया जाए। महर्षि प्रबंधन विश्वविद्यालय के एक बयान के अनुसार एल्डर ने कहा, तनाव कम होने से मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
हृदय की बीमारियों के लिए जिम्मेदार कारक उच्च रक्तचाप, मोटापा और मधुमेह के खतरे भी कम हो जाते हैं। महर्षि प्रबंधन विश्वविद्यालय के अनुसार जरूरी नहीं कि ध्यान की कोई निर्धारित तकनीक ही इस्तेमाल की जाए। बीस या इससे कुछ ज्यादा मिनटों तक सुबह के वक्त स्नानादि से निपटने के बाद निश्चल हो कर शांत चित्त बैठने का अभ्यास किया जाए तो नतीजे महसूस किए जा सकते हैं।