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प्रार्थना, जो हमें हमारे पिछले जन्मों के ऋण से उबार सके
आचार्य महाप्रज्ञ/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 21 Sep 2013 10:23 AM IST
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आंतरिक शक्ति ही वह आधार है, जो मनुष्य से उसके अपने संबंधों को परिभाषित करती है। यह मानव जीवन का एक विस्मयकारी घटक है, जिस पर हमारी सामान्य सफलता सर्वाधिक निर्भर करती है। यह शक्ति हमारे व्यक्तित्व और दैनिक जीवन के लिए निरंतर संदेश भेज कर प्रभावित करती रहती है। ये संदेश हमें अंतर्ज्ञान, प्रेरणा और मौलिक विचारों के रूप में मिलते हैं।
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ये बताते हैं कि अपने विवेक में उदात्त-आत्मा हमसे क्या करना चाहती है। यदि हम इन संकेतों को समझें और उनके अनुसार काम करें, तो हमारा जीवन रचनात्मक हो जाएगा। हम देंखेगे कि जीवन की हर दिशा में सब कुछ अच्छा व सफलतादायक हो रहा है। हम अपने मन को शांत और स्थिर करके इन संदेशों को प्रभावी तरीके से ग्रहण कर सकते हैं। नियमित ध्यान इसका एक अच्छा उपाय है।
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ध्यान की अवस्था में शक्ति हम से बात कर सकती है और हम उसे सुन सकते हैं। यदि हम उसके निर्देशों का अनुसरण करें, तो यह और भी स्पष्ट रूप से बात करेगी। ध्यान के बाद आंतरिक शक्ति और जीवन के रूपांतरण में विश्वास ही वह तार जो हमें उससे जोड़ता है। जब हम अपने चेतन मन और उस शक्ति के साथ स्पष्ट संपर्क बना लेते हैं, तो परिणाम और भी अच्छे होते हैं, क्योंकि तब हमारी आत्मा हमें ये संदेश अधिक स्पष्ट व प्रभावी तरीके से भेज सकता है।
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इसके प्रति अविश्वास संपर्क को बिगाड़ता है और कुछ मामलों में तो इसे नष्ट ही कर देता है। तब हम प्रायः अंतश्चेतना के निर्देश के बिना आसानी से भटक जाते हैं, तब परिणाम असफलता के रूप में मिलता है। यदि हम आंतरिक शक्ति की बात सुनें और उसके संदेश का पालन करें, तो भय या चिंता दूर हो जाएगी। हम स्थिर संतुलित हो जाएंगे। जो भौतिक सफलता के बड़े कारक हैं।
हम जीवन और मृत्यु दोनों के भय से मुक्त हो जाते हैं। हम जानते हैं कि सब कुछ विवेक से प्रेरित है और परिणाम आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत अच्छा होगा। हम अपनी आंतरिक शक्ति से प्रार्थना करके, उससे बातचीत करके, चर्चा करके अच्छे-अच्छे परिणामों में वृद्धि कर सकते हैं, क्योंकि यह तो हमारे सांस लेने से भी अधिक निकट हैं।
तब यह हमें सुनेगी और विवेकपूर्ण प्रत्युत्तर देगी। कुछ लोग इसे ईश्वर से प्रार्थना करना कहते हैं। एक ही बात है, क्योंकि यह चिरंतन अंतश्चेतना है। प्रार्थना करके हम अपने लिए एक नवीन सार्थक भाग्य का निर्माण करते हैं, जो हमारे पिछले जन्मों के ऋण से हमें उबार सके।