फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Wellness ›   asharam bapu pravachan

उन्नति के लिए अपनी कद्र करना सीखें: आशाराम बापू

Sat, 08 Jun 2013 05:05 PM IST
नई दिल्ली/ इन्टरनेट डेस्क
नई दिल्ली/ इन्टरनेट डेस्क Updated Sat, 08 Jun 2013 05:05 PM IST
विज्ञापन
asharam bapu pravachan

हमको श्रद्धा के साथ-साथ सत्संग के द्वारा समझना चाहिए कि शिवलिंग यह भगवान तो है लेकिन इस भगवान में घन सुषुप्ति में चैतन्य बैठा है। तर्क करना हो और अश्रद्धा करनी हो तो भगवान साक्षात् आ जायें तो भी दुर्योधन जैसा व्यक्ति उनमें भी अश्रद्धा करता है।

विज्ञापन


दुर्योधन ने श्रीकृष्ण को कैद करने का आदेश दिया तो श्रीकृष्ण द्विभुजी से चतुर्भुजी होकर आकाश में स्थित हुए लेकिन दुर्योधन कहता है कि यह तो जादूगर है। दुर्योधन और शकुनि श्रीकृष्ण के लिए कुछ-का-कुछ बकते हैं लेकिन अर्जुन श्रीकृष्ण से फायदा उठाता है; गीता बनी और हमलोग भी फायदा उठा रहे हैं।
विज्ञापन

 
श्रद्धाविहीन लोग श्रीकृष्ण के दर्शन व चतुर्भुजी नारायण के दर्शन के बाद भी दुर्बुद्धि का परिचय देते हैं। ऐसे दुर्योधनों की कमी नहीं है समाज में। श्रद्धालु व समझदार सज्जन तो शालग्राम, शिवलिंग और मूर्ति में श्रद्धा एवं भगवद्भाव से अपनी बुद्धि और जीवन में चिन्मय चैतन्य को प्रकट करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
जिसके जीवन में सूझबूझ है, जिसे अपने जीवन की कद्र है वह महापुरुषों, शास्त्रों, वेदों की कद्र करेगा। शराब व मांस का सेवन करनेवालों की मति ईश्वरप्राप्ति के योग्य नहीं रहती। ऐसे लोग स्वयं का ही अवमूल्यन करते हैं। ‘गुरुवाणी’ में आता हैः
जे रतु1 लगै कपड़ै जामा2 होइ पलीतु3।
जो रतु पीवहि माणसा तिन किउ4 निरमलु चीतु5।
(1. रक्त 2. वस्त्र 3. अपवित्र 4. कैसे 5. शुद्ध चित्त)
भगवान राम कहते हैं :
निर्मल मन जन सो मोहि पावा।
 
शराब और मांस निर्मल मति को मलिन कर देते हैं। आत्मसाक्षात्कार की योग्यतावाला मनुष्य अपने को अयोग्य बनानेवाला खान-पान और चिंतन करे, अपने आत्मदेव को छोड़कर देश-देशान्तर में ईश्वर को माने या स्वर्ग अथवा बिहिश्त की कल्पना करे यह कितनी तुच्छ बात है! कितनी छोटी मान्यता, मति-गति है!

जिसको अपने जीवन की कद्र नहीं है वह शास्त्रों की कद्र क्या करेगा, महापुरुषों की कद्र क्या करेगा, अपना ही जीवन खपा देगा। यदि तुमको अपने जीवन की कद्र है, अपने जीवनदाता की, शास्त्रों की, अपने माता-पिता की कद्र है कि कितनी मेहनत करके तुम्हें पढ़ाया, बड़ा किया तो तुम ऐसे कर्म करो जिनसे तुम्हारे सात कुल तर जायें।

दुःख आया तो दुःखी हो गये, सुख आया तो सुखी हो गये तो तुम्हारे-हमारे में और कुत्ते में क्या फर्क है? अरे, सुख को सपना, दुःख को बुलबुला, दोनों को मेहमान जान... अपने को दास क्यों बनाता है? पदोन्नति हो गयी तो हर्षित हो गये, बदली हो गयी तो सिकुड़ गये। इतनी लाचार जिंदगी क्यों गुजारता है? गुरु की शरण जा।

जरा-सा किसी ने डाँट दिया, तेरी खुशी गायब! जरा-सा किसी ने पुचकार दिया तो खुश! तो तू तो जर्मन का खिलौना है और क्या है? जरा-सा नोटिस आ गया तो तेरी चिंता बढ़ गयी। जरा-सा कहीं छापा पड़ा तो तेरी मुसीबत बढ़ गयी। जरा-सी अफसर से पहचान हो गयी तो तूने छाती फुला दी।

तू इन खिलौनों को सच मानकर क्यों उलझ रहा है? अपने आत्मा को जानने के लिए कुछ तो आगे बढ़ भाई! जो परम मित्र, परम हितैषी है उसका अहोभाव से चिंतन कर, उसकी स्मृति कर और उसका ज्ञान पाकर उसीमें आनंदित हो, प्रशांत हो और विश्रांति पा।

साभारः ‘ऋषि प्रसाद’ विभाग, संत श्री आसारामजी आश्रम
संत श्री आशारामजी बापू परिचय
संत श्री आशारामजी बापूजी न केवल भारत को अपितु सम्पूर्ण विश्व को अपनी अमृतमयी वाणी से तृप्त कर रहे हैं। संत श्री आसारामजी बापू का जन्म सिंध प्रान्त के नवाबशाह ज़िले में बेराणी गाँव में नगर सेठ श्री थाऊमलजी सिरुमलानी के घर 17 अप्रैल 1941 को हुआ। देश-विदेश में इनके 410 से भी अधिक आश्रम व 1400 से भी अधिक श्री योग वेदांत सेवा समितियाँ लोक-कल्याण के सेवाकार्यों में संलग्न हैं।


गरीब-पिछड़ों के लिए ‘भजन करो, भोजन करो, रोजी पाओ’ जैसी योजनाएं, निःशुल्क चिकित्सा शिविर, गौशालाएं, निःशुल्क सत्साहित्य वितरण, नशामुक्ति अभियान आदि सत्प्रवृत्तियां भी आश्रम व समितियों द्वारा चलायी जाती है। आशा राम बापू जी भक्तियोग, कर्मयोग व ज्ञानयोग की शिक्षा से सभी को स्वधर्म में रहते हुए सर्वांगीण विकास की कला सिखाते हैं।



विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स, परामनोविज्ञान समाचार, स्वास्थ्य संबंधी योग समाचार, सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed