नाथ संप्रदाय :योगी आदित्यनाथ दूसरी बार बनने जा रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री,जानिए नाथ संप्रदाय का इतिहास
योगी लगातार दूसरी बार पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री का कमान संभालेंगे और उनके साथ कई मंत्री भी शपथ लेंगे। योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री की गद्दी के साथ गोरक्षपीठाधीश्वर के महंत भी हैं।
विस्तार
आज योगी आदित्यनाथ दूसरी बार देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। हाल ही में संपन्न हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को बंपर जीत हुई है। योगी लगातार दूसरी बार पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री का कमान संभालेंगे और उनके साथ कई मंत्री भी शपथ लेंगे। योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री की गद्दी के साथ गोरक्षपीठाधीश्वर के महंत भी हैं। मुख्यमंत्री योगी का गोरखनाथ और नाथ संप्रदाय से गहरा रिश्ता है। गोरखपुर स्थित गोरक्षनाथ पीठ मठ का बड़ा ही महत्व है। यह राजनीति और आध्यात्मिक का केंद्र बिंदु है। मुख्यमंत्री योगीनाथ जिस नाथ संप्रदाय से संबंध रखते हैं इसके संस्थापक नाथ सम्प्रदाय के मत्स्येंद्र नाथ थे। फिर इनके शिष्य गोरखनाथ 11वीं सदी के एक प्रसिद्ध योगी थे। आइए विस्तार से जानते हैं क्या है नाथ संप्रदाय का इतिहास और इसका महत्व
- योगी आदित्यनाथ जिस गोरखपुर से आते हैं यह शहर प्रदेश के अध्यात्म का केंद्र रहा है। गुरु के नाम पर इस क्षेत्र का नाम गोरखपुर पड़ा।
- योगी आदित्यनाथ जिस नाथ संप्रदाय से आते हैं उनके अनुयायियों को योगी कहा जाता है। मान्यता है कि गुरु गोरखनाथ का जम्म गोबर में हुआ था जिसके कारण उनका नाम गोरखनाथ पड़ा।
- नाथ पंथ में गोरखनाथ को शिव का अवतार भी माना जाता है।
-नाथ संप्रदाय में किसी से भी कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। इस संप्रदाय से जुडने के लिए किसी भी जाति,वर्ण और उम्र का व्यक्ति हो सकता है।
- नाथ संप्रदाय को अपनाने के बाद 12 साल तक की कड़ी तपस्या से गुजरने के बाद संन्यासी को दीक्षा दी जाती है।
- नाथ संप्रदाय से जुड़े योगियों की चिता नहीं जलाई जाती है। ये समाधि लेते हैं।
- नाथ संप्रदाय में मां भगवती की आराधना का विशेष महत्व होता है।
-नाथ संप्रदाय में कर्ण भेदन और बिना सिले कपड़े पहनने की परंपरा निभाई जाती है।
- नाथ संप्रदाय देश का प्राचीन योग और आध्यात्म का संप्रदाय है। यहां हठ योग पर आधारित विद्या सिखाई जाती है।
- नेपाल के राजा गोरखनाथ को प्रधान गुरु के रूप में मानते रहे हैं।
- नाथ संप्रदाय 12 शाखाओं में बंटा है, जिसे बारह पंथ कहते हैं।
- पहले दस नाथ कौन थे-आदिनाथ, आनंदिनाथ, करालानाथ, विकरालानाथ, महाकाल नाथ, काल भैरव नाथ, बटुक नाथ, भूतनाथ, वीरनाथ और श्रीकांथनाथ
- नाथ संप्रदाय के परंपरा संस्थापक आदिनाथ स्वयं शंकर के अवतार माने जाते हैं।
- नाथ संप्रदाय में शुद्ध हठयोग और राजयोग की साधनाएं मुख्य रूप से निभाई जाती है।
- नाथ संप्रदाय के प्रमुख ग्रंथ इस प्रकार हैं- गोरक्षनाथकृत हठयोग, गोरक्षनाथकृत ज्ञानामृत, गोरक्षकल्प सहस्त्रनाम, चतुरशीत्यासन, योगचिन्तामणि, योगमहिमा, योगमार्तण्ड, योगसिद्धांत पद्धति, विवेकमार्तण्ड, सिद्धसिद्धांत पद्धति, गोरखबोध, दत्त-गोरख संवाद, गोरखनाथजी द्वारा रचित पद, गोरखनाथ के स्फुट ग्रंथ, ज्ञानसिद्धांत योग, ज्ञानविक्रम, योगेश्वरी साखी, नरवैबोध, विरहपुराण और गोरखसार ग्रंथ आदि