यमराज को मिला यह कैसा शाप धरती पर जन्म लेकर भुगतना पड़ा अजब दंड
यमराज मृत्यु के देवता हैं और मृत्यु के बाद जीवों को उनके कर्मों का दंड देते हैं। इसलिए मृत्यु के देवता से सभी डरते हैं लेकिन एक व्यक्ति ऐसा हुआ जो मृत्यु के देवता से बिल्कुल भी नहीं डरा और जब यमराज के दरबार में पहुंचा तो अपने जीवन काल में हुए घटना के लिए यमराज को ही दोषी बना दिया।
यमराज उसे समझाते रहे, लेकिन उसने क्रोध में आकर यमराज को शाप दे दिया और इस शाप के कारण यमराज को धरती पर एक मनुष्य के रुप में जन्म लेना पड़ा। विद्वान, योग्य और स्वस्थ होने के बावजूद जीवन भर उन्हें अपमानित और उस अधिकार से वंचित रहना पड़ा जिसके वह काबिल थे।
आइये जानें कि यमराज को क्यों और किसने शाप दिया और धरती पर यमराज क्या कहलाए।
मनुष्य रूप में जन्मे स्वयं यमराज
महाभारत में एक कथा है कि चित्रांगद और विचित्रवीर्य की असमय मृत्यु हो जाती है। ऐसे में समस्या सामने आती है कि कुरुवंश का उत्तराधिकारी कौन बनेगा। इस समस्या का समाधान करने के लिए सत्यवती अपने दोनों बेटों की पत्नियों को अपने ऋषि पुत्र व्यास के पास संतान प्राप्ति के लिए भेजती हैं।
अंबिका ऋषि व्यास के संयासी रुप को देखकर डर जाती हैं और संसर्ग के दौरान आंखे बंद कर लेती हैं जिससे इनका पुत्र अंधा होता है। अंबालिका ने संकोच के कारण अपने शरीर पर चंदन का लेप लगा लिया इसलिए इनका पुत्र पांडुरोगी पांडु हुआ।
यह बात जब सत्यवती को ज्ञात हुआ तो सत्यवती ने अपनी बहुओं को फिर से व्यास के पास जाने के लिए कहा। लेकिन इस बार अंबिका और अंबालिका ने अपनी जगह अपनी एक दासी को भेज दिया।
दासी भी व्यास के साथ संसर्ग से गर्भवती हुई और उसने एक स्वस्थ संतान को जन्म दिया। यह संतान विद्वान और हर तरह से योग्य विदुर कहलाया। विदुर कोई और नहीं बल्कि शाप के कारण मनुष्य रूप में जन्मे स्वयं यमराज थे।
यमराज को शाप
यमराज को किसने और कब शाप मिला इस विषय में एक कथा है कि मांडव्य नाम के ऋषि तपस्या में लीन थे। उसी समय चोरों का एक गिरोह आकर ऋषि के आश्रम में आकर छुप गया। ऋषि इस बात को जब तक समझ पाते तब तक राजा के सिपहियों ने मांडव्य ऋषि को चोरों को शरण देने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया।
ऋषि को चोरों की मदद करने के लिए भले से बींधकर मार दिया गया। ऋषि की आत्मा जब यमराज के दरबार में पहुंची तो उन्होंने यमराज से पूछा कि मैंने आजीवन किसी भी जीव-जंतु को चोट नहीं पहुंचाई फिर मुझे इस प्रकार मौत क्यों मिली।
यमराज ने उत्तर दिया कि जब आप बच्चे थे तब आप सींक लेकर कीट-पतंगों को बींधा करते थे। उसी कर्म की आपको सजा मिली है। ऋषि ने कहा कि बचपन में तो व्यक्ति निश्छल होता है उसकी सजा देना अन्याय है।
यमराज ने कहा 'यह कर्मफल का नियम है'। यमराज की इस बात से क्राधित होकर मांडव्य ऋषि ने यमराज को शाप दे दिया कि मनुष्य योनी में जन्म लेकर आदर्श शासक के सभी गुणों से परिपूर्ण होने के बावजूद कभी राजा बनना नसीब नहीं होगा।
पेंगुइन बुक्स द्वारा प्रकाशित देवदत्त पटनायक की पुस्तक जय महाभारत का अंश