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यह है शनि से भयभीत होने का कारण

Sat, 09 Mar 2013 04:32 PM IST
पं.केवल आनन्द जोशी (ज्योतिषाचार्य)
पं.केवल आनन्द जोशी (ज्योतिषाचार्य) Updated Sat, 09 Mar 2013 04:32 PM IST
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why people afraid from shani grah

शनि का जन्म पुराणों और शास्त्रानुसार कश्यप मुनि के वंशज भगवान सूर्यनारायण की पत्नी स्वर्णा (छाया) की कठोर तपस्या से ज्येष्ठ मास की शनि अमावस्या को सौराष्ट्र के शिंगणापुर में हुआ। माता ने शंकर जी की कठोर तपस्या की। तेज गर्मी व धूप के कारण माता के गर्भ में स्थित शनि का वर्ण काला हो गया।

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एक बार जब भगवान सूर्य पत्नी छाया से मिलने गए तब शनि ने उनके तेज के कारण अपने नेत्र बंद कर लिए। सूर्य ने अपनी दिव्य दृष्टि से इसे देखा व पाया कि उनका पुत्र तो काला है जो उनका नहीं हो सकता। शनि की पत्नी छाया को सूर्य ने इसके बाद कभी भी स्वीकार नहीं किया और कालान्तर में शनि अपने पिता सूर्य का कट्टर दुश्मन हो गया।
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सूर्य ने छाया से अपना यह संदेह व्यक्त भी कर दिया। इस कारण शनि के मन में अपने पिता के प्रति शत्रुवत भाव पैदा हो गया। शनि के जन्म के बाद पिता ने कभी उनके साथ पुत्रवत प्रेम प्रदर्शित नहीं किया। इस पर शनि ने भगवान शिव की कठोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया। शिव की भक्ति और तप ने बालक शनि को अद्भुत व अपार शक्ति से युक्त कर दिया।
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जब भगवान शिव ने उनसे वरदान मांगने को कहा तो शनि ने कहा कि पिता सूर्य ने मेरी माता का अनादर कर उन्हें प्रताड़ित किया है। मेरी माता हमेशा अपमानित व पराजित होती रही। इसलिए आप मुझे सूर्य से अधिक शक्तिशाली व पूज्य होने का वरदान दें। तब भगवान आशुतोष ने वर दिया कि तुम नौ ग्रहों में श्रेष्ठ स्थान पाने के साथ ही सर्वोच्च न्यायाधीश व दंडाधिकारी रहोगे। साधारण मानव तो क्या देवता, असुर, सिद्ध, विद्याधर, गंधर्व व नाग सभी तुम्हारे नाम से भयभीत होंगे।

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