शादी के बाद ही क्यों मंगलसूत्र पहनती हैं लड़कियां?
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मंगलसूत्र विवाह का प्रतीक चिन्ह है। विवाह के बाद यह हर सुहागन स्त्री के सुहाग की निशानी के तौर उनके गले की शोभा बढ़ाता है। महिलाएं इसे अपने पति का प्रेम मानकर सीने से लगाए रखती हैं।
महिलाएं इसे अपने से अलग तभी करती हैं जब पति दुनिया में न हो या दोनों के बीच संबंध टूट चुके हों।
मंगलसूत्र धारण करने का नियम कब से
मंगलसूत्र धारण करने का नियम कब से चला आ रहा है यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता है।
लेकिन ऐसा माना जाता है कि मंगलसूत्र धारण करने का नियम वैदिक काल से चला आ रहा है। और लोग इसमें बड़ी आस्था रखते हैं इसके पीछे मंगलसूत्र में चमत्कारी गुणों की मौजूदगी है।
मंगलसूत्र में काले मोती का रहस्य
विवाह के समय दुल्हन पर सबकी नजर टिकी होती है। इससे दुल्हन को नज़र लगने का भय रहता है। मंगलसूत्र में पिरोए गये काले मोती से काल यानी अशुभ शक्तियां दूर रहती है।
मंगलसूत्र बुरी नज़र से रक्षा करता है इस मान्यता के कारण विवाह के समय दुल्हन को मंगलसूत्र पहनाया जाता है। मंगल सूत्र के विषय में यह भी मान्यता है कि इससे पति पर आने वाली विपत्तियां दूर होती है।
मंगलसूत्र पर बने चिन्ह
मंगलसूत्र में सोने का पेंडेंट लगा होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि स्वर्ण धारण करने से शरीर शुद्ध होता है। स्नान के समय सोने का स्पर्श करके जो पानी शरीर पर गिरता है उससे पापों से मुक्ति मिलती है।
मंगलसूत्र में मोर का चिन्ह बना होता है जो पति के प्रति प्रेम का प्रतीक माना जाता है। पेंडेंट पर कुछ अन्य चिह्न भी बने होते हैं जो बुरी नज़रों से बचाने वाले माने जाते हैं।
शनि और गुरु का संबंध मंगलसूत्र से
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सोना गुरू के प्रभाव में होता है। गुरू ग्रह को वैवाहिक जीवन में खुशहाली, संपत्ति एवं ज्ञान का कारक माना जाता है।
गुरु धर्म का कारक ग्रह भी है। काला रंग शनि का प्रतीक माना जाता है। शनि स्थायित्व एवं निष्ठा का कारक ग्रह होता है। गुरू और शनि के बीच सम संबंध होने के कारण मंगलसूत्र वैवाहिक जीवन में सुख एवं स्थायित्व लाने वाला माना जाता है।