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जानिए कलाई पर क्यों बांधा जाता है कलावा, क्या है धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व ?

Mon, 06 Sep 2021 07:18 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 06 Sep 2021 07:18 PM IST
सार

Why Kalava is Tied on The Wrist Raksha Sutra Mantra

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why kalava is tied on the wrist raksha sutra mantra bandhne ka tarika fayde
कलावे के बिना किसी भी तरह का शुभ कार्य संपन्न नहीं होता है। - फोटो : अमर उजाला

हिंदू धर्म में कई तरह के पूजा-अनुष्ठान, रीति- रिवाज और परंपराएं निभाई जाती हैं। बालक के जन्म से लेकर मृत्यु तक कुल सोलह संस्कार बताए गए हैं जो समय के साथ-साथ चलती रहती हैं। हिंदू धर्म में किसी भी तरह की पूजा के बाद कलाई पर कलावा बांधा जाता है। कोई भी पूजा पाठ बिना कलावे के पूरी नहीं होता है। मान्यताओं के अनुसार कलावे में कई तरह की दैवीय शक्तियां समाहित होती है। जो व्यक्ति को बुरी नजर, परेशानी और नकारात्मक ऊर्जाओं के प्रभाव से बचाता है। कलावा को रक्षासूत्र और मोली भी कहा जाता है। कलावे के बिना किसी भी तरह का शुभ कार्य संपन्न नहीं होता है। कलावा सस्ंकृति, संकल्प, रक्षा और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।


 
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भगवान का मिलता है आशीर्वाद
शास्त्रों में हाथों पर कलावा बांधने के बारे में विस्तार से बताया है, जिसके अनुसार कलावा बांधने से त्रिवेदों और तीनों महादेवियों की कृपा प्राप्त होती है। ये महादेवियां हैं- महालक्ष्मी, जिनकी कृपा से धन संपत्ति आती है। दूसरी महादेवी हैं सरस्वती, जिनकी कृपा से विद्या बुद्धि प्राप्त होती है और तीसरी देवी हैं मां काली, इनकी कृपा से मनुष्य बल और शांति प्राप्त करता है। कलावा बाँधने की प्रथा तबसे चली आ रही है जब दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए श्री विष्णु अवतार वामन भगवान ने उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बाँधा था। आज भी पंडित पूजा के बाद कलावा बांधते वक्त इस चमत्कारी मंत्र का उच्चारण करते हैं ।
मंत्र-
 येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
 तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

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वास्तुशास्त्र में दिशाओं का महत्व

वास्तु में रक्षासूत्र का महत्व
मौली को कई जगह कलावा भी कहा जाता है, यह दिखने में लाल और केसरी रंग का होता है। ये रंग शक्ति, शौर्य एवं सौभाग्य का प्रतीक है। वास्तु के अनुसार माना जाता है कि कलाई पर मौली बांधने से जीवन पर आने वाले कई संकटों से रक्षा होती है। शरीर में पंच तत्वों का संतुलन ठीक बना रहता है, जिस कारण ये धागा आपको कई रोगों से भी बचाता है। न केवल इसे बांधने से बल्कि मौली से बनाई गईं सजावट की वस्तुओं को भी घर में रखने से बरकत होती है और सकारात्मक ऊर्जा के स्तर में वृद्धि होती है।

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vastu tips
रक्षासूत्र बांधने के नियम
शास्त्रों के अनुरूप पुरुषों और अविवाहित कन्याओं को दाएं हाथ में कलावा बाँधना चाहिए एवं विवाहित स्त्रियों  के लिए बाएं हाथ में कलावा बाँधने का विधान है। कलावा बंधवाते समय उस हाथ की मुट्ठी को बंद रखकर दूसरा हाथ सिर पर रखना चाहिए। कलावे का बांधा जाना हमें उस संकल्प को याद करते रहना तथा उसकी पूर्ती के लिए प्रयास करते रहना सिखाता है। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से हाथ में कलावा बंधे होने से व्यक्ति को स्वयं ही परमात्मा द्वारा अपनी रक्षा होने का आभास होता है। जिससे मन में शांति व आत्मबल में वृद्धि होती है। व्यक्ति के मन -मस्तिष्क में बुरे विचार नहीं आते।

मौली और आयुर्वेद
शरीर विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो कलावा बाँधने से स्वास्थ्य उत्तम रहता है । त्रिदोष -वात , पित्त तथा कफ का शरीर में संतुलन बना रहता है ।


 
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