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Vrishabha Sankranti 2021: 14 मई को वृषभ संक्रांति, इस दिन जप, तप, दान करने से मिलता है पुण्यफल

Thu, 06 May 2021 04:14 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Thu, 06 May 2021 04:14 PM IST
सार

वृषभ संक्रांति के दिन पूजा, जप, तप और दान करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है। इस महीने में प्यासे को पानी पिलाने अथवा घर के बाहर प्याऊ लगाने से व्यक्ति को यज्ञ कराने के समतुल्य पुण्यफल मिलता है।

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Vrishabha Sankranti 2021 know significance of Vrishabha Sankranti
वृषभ संक्रांति 2021 - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

वृषभ संक्रांति पर्व 14 मई शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। शास्त्रों में वृषभ संक्रांति को मकर संक्रांति के समान माना गया है। इस दिन पूजा-पाठ, जप, तप और दान का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, संक्रांति के दिन किसी पवित्र नदी अथवा जलकुंड में नहाने से तीर्थस्थलों के समान पुण्यफल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं वृषभ संक्रांति के महत्व के बारे में।

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सूर्य का वृष राशि में गोचर 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
सूर्य देव करेंगे वृष राशि में प्रवेश

वृषभ संक्रांति में समस्त ग्रहों के प्रधान सूर्य देव 14 मई को मेष राशि से वृष राशि में प्रवेश करेंगे। इस राशि में सूर्य देव 15 जून 2021 तक विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को आत्मा, मान सम्मान, उच्च पद आदि का कारक माना गया है। 

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वृषभ संक्रांति 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
वृषभ संक्रांति क्या है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य देव एक मास में एक राशि से दूसरी राशि में संचरण करते हैं। जब सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं तो इसे संक्रांति कहते हैं। वहीं जब सूर्य देव अपनी उच्च राशि राशि मेष से निकलकर वृष राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे वृषभ संक्रांति कहते हैं। सूर्य के इस राशि परिवर्तन से मौसम में भी परिवर्तन देखने को मिलते हैं।

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वृषभ संक्रांति 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
वृषभ संक्रांति का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, वृषभ संक्रांति के दिन पूजा, जप, तप और दान करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है। इस महीने में प्यासे को पानी पिलाने अथवा घर के बाहर प्याऊ लगाने से व्यक्ति को यज्ञ कराने के समतुल्य पुण्यफल मिलता है। इस दिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का एक मनके जाप जरूर करना चाहिए।

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वृषभ संक्रांति 2021 - फोटो : अमर उजाला
इस दौरान लगता है नौतपा 

वृषभ संक्रांति के दौरान सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में आते हैं और इस नक्षत्र में 15 दिनों तक रहते हैं इसमें शुरूआती नौ दिनों तक प्रचंड गर्मी पड़ती है। इन नौ दिनों को 'नवतपा' कहा जाता है। यदि इन नौ दिनों में किसी भी प्रकार से वर्षा न हो और न ही ठंठी हवा चले तो यह माना जाता है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश हो सकती है।

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