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Varuthini Ekadashi 2021: भगवान श्रीकृष्ण ने बताया था वरुथिनी एकादशी व्रत का महत्व, जानें व्रत विधि और कथा

Fri, 07 May 2021 07:07 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Fri, 07 May 2021 07:07 AM IST
सार

भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को वरुथिनी एकादशी व्रत का महत्व बताया था, उनके अनुसार, जो कोई व्यक्ति वरुथिनी एकादशी व्रत विधि-विधान से रखता है उसके समस्त प्रकार के पाप मिट जाते हैं और अंत में उसे स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है।

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varuthini ekadashi 2021 shubh muhurat puja vidhi and vrat katha
वरुथिनी एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वरुथिनी एकादशी वैशाख माह में कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को कहा जाता है। इस साल यह एकादशी तिथि 7 मई शुक्रवार के दिन पड़ रही है। एकादशी व्रत भगवान विष्णु जी का आशीर्वाद पाने के लिए रखा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को वरुथिनी एकादशी व्रत का महत्व बताया था, उनके अनुसार, जो कोई व्यक्ति वरुथिनी एकादशी व्रत विधि-विधान से रखता है उसके समस्त प्रकार के पाप मिट जाते हैं और अंत में उसे स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं वरुथिनी एकादशी की तिथि, मुहूर्त, व्रत विधि और कथा।

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वरुथिनी एकादशी व्रत मुहूर्त

एकादशी तिथि 06 मई 2021 को दोपहर 02 बजकर 10 मिनट से प्रारंभ होगी और यह एकादशी 07 मई 2021 को शाम 03 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी। जबिक द्वादशी तिथि (08 मई) के दिन व्रत पारण मुहूर्त प्रातः 05 बजकर 35 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।

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वरुथिनी एकादशी पूजा विधि

प्रात: जल्दी उठ कर स्नान करें। स्नान के बाद घर के मंदिर में दीपक जलाएं। भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्नान करवाएं। भगवान विष्णु की विधि- विधान से पूजा करें। भगवान की आरती करें। वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को भोग अवश्य लगवाएं। द्वादशी के दिन विधि विधान से व्रत खोलें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा देकर विदा करें।

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वरुथिनी एकादशी व्रत की कथा
एकबार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से वैशाख माह कृष्ण पक्ष की एकादशी के महत्व व व्रत कथा को सुनने की जब इच्छा जताई तब भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाया कि प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नामक राजा राज करता था। राजा की रुचि हमेशा धार्मिक कार्यों में रहती थी। वह हमेशा पूजा-पाठ में लीन रहते था। एक बार राजा जंगल में तपस्या में लीन था तभी एक जंगली भालू आया और राजा का पैर चबाने लगा। राजा इस घटना से तनिक भी भयभीत नहीं हुआ और भालू राजा के पैर को चबाते हुए घसीटकर ले जाने लगा। तब राजा मान्धाता ने अपनी रक्षा के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना की। राजा की पुकार सुनकर भगवान विष्णु प्रकट ने चक्र से भालू को मार डाला।

राजा का पैर भालू खा चुका था इसलिए राजा इस बात को लेकर बहुत परेशान हो गया। वहीं अपने दुखी भक्त को देखकर भगवान विष्णु बोले- 'हे वत्स! शोक मत करो। तुम मथुरा जाओ और वरुथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरी वराह अवतार मूर्ति की पूजा करो। उसके प्रभाव से पुन: सुदृढ़ अंगों वाले हो जाओगे। इस भालू ने तुम्हें जो काटा है, यह तुम्हारे पूर्व जन्म का अपराध था। भगवान की आज्ञा मानकर राजा ने मथुरा जाकर श्रद्धापूर्वक यह व्रत किया। इसके प्रभाव से वह सुंदर और संपूर्ण अंगों वाला हो गया। अतः जो भी वरुथिनी एकादशी व्रत रखता है उनके सारे पाप नष्ट होते हैं। साथ ही साथ स्वर्ग की प्राप्ति भी होती है।
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