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Ekadashi 2021: इस दिन है वरुथिनी एकादशी, पढ़ें व्रत कथा

Sat, 24 Apr 2021 04:48 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Sat, 24 Apr 2021 04:48 PM IST
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varuthini Ekadashi 2021 know the date importance and ekadashi vrat katha
वरुथिनी एकादशी 2021 - फोटो : Social media

प्रत्येक माह में दोनों पक्षों की ग्यारहवीं तिथि एकादशी का व्रत किया जाता है। वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है। इस बार वरुथिनी एकादशी का व्रत 7 अप्रैल 2021 दिन शुक्रवार को किया जाएगा। यह व्रत करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है मनुष्य के सभी पाप कर्मों का नाश हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है साथ ही यह व्रत सुख समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करने वाला है। इस व्रत को करने से कन्या दान करने और हजारों वर्षों का तप करने के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजन करना चाहिए और एकादशी महात्म की कथा पढ़नी चाहिए।

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वरुथिनी एकादशी 2021 - फोटो : lord vishnu (demo pic)

वरूथिनी एकादशी व्रत की कथा

एक समय नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नाम के राजा का राज्य था। राजा की रुचि हमेशा धार्मिक कार्यों में रहती थी। वह हमेशा पूजा-पाठ में लीन रहते थे। एक बार राजा जंगल में तपस्या में लीन थे कि अचानक तभी वहां एक जंगली भालू आया और उनका पैर चबाने लगा। राजा इस घटना से तनिक भी भयभीत नहीं हुए और कष्ट सहते हुए भी अपनी तपस्या में लगे रहे। बाद में वे उनके पैर को चबाते हुए भालू को घसीटकर पास के जंगल में ले गए। तब राजा मान्धाता ने भगवान विष्णु से प्रार्थना करने लगे। राजा की पुकार सुनकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और अपने सुदर्शन चक्र से भालू का अंत कर दिया।

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वरुथिनी एकादशी 2021

राजा का पैर भालू खा चुका था और वह इस बात को लेकर वह बहुत परेशान हो गए। दुखी भक्त को देखकर भगवान विष्णु बोले- 'हे वत्स! शोक मत करो। तुम मथुरा जाओ और वरुथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरी वराह अवतार मूर्ति की पूजा करों। उसके प्रभाव से पुन: सुदृढ़ अंगो वाले हो जाओगे। इस भालू ने तुम्हें जो काटा है, यह तुम्हारे पूर्व जन्म का अपराध था। भगवान की आज्ञा मानकर राजा ने मथुरा जाकर श्रद्धापूर्वक यह व्रत किया। इसके प्रभाव से वह सुंदर और संपूर्ण अंगो वाला हो गया। जिस तरह से वरुथिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से राजा मधान्ता को कष्टों से मुक्ति प्राप्त हुई उसी प्रकार से यह व्रत भक्तों को कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला है।

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