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Utpanna Ekadashi 2023: बहुत खास माना जाता है उत्पन्ना एकादशी का व्रत? पढ़िए इससे जुड़ी पौराणिक कथा

Fri, 08 Dec 2023 03:48 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Fri, 08 Dec 2023 03:48 AM IST
सार

Utpanna Ekadashi 2023: मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी उत्पन्ना एकादशी कहलाती है। सभी एकादशियों इसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल 08 दिसंबर को उत्पन्ना एकादशी है। उत्पन्ना एकादशी का व्रत पूरे नियम, भक्ति भाव और विश्वास के साथ रखा जाता है।

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Utpanna Ekadashi 2023 Kab Hai Utpanna Ekadashi Vrat Katha in Hindi
उत्पन्ना एकादशी से जुड़ी पौराणिक कथा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Utpanna Ekadashi 2023: हिंदु धर्म में एकादशी तिथि को बहुत ही पवित्र माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में दो एकदशी आती है, जिसमें एक शुक्ल पक्ष की एकादशी होती है और दूसरी कृष्ण पक्ष की। मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी उत्पन्ना एकादशी कहलाती है। सभी एकादशियों इसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल 08 दिसंबर को उत्पन्ना एकादशी है। उत्पन्ना एकादशी का व्रत पूरे नियम, भक्ति भाव और विश्वास के साथ रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से अश्वमेघ यज्ञ और तीर्थ स्थानों में स्नान-दान आदि से मिलने वाले पुण्य से भी अधिक फल मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी से जुड़ी पौराणिक कथा-

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सतयुग में मुरु नाम का एक असुर था जो बहुत अत्याचारी था। मुरु नाम के इस असुर ने देवलोक में सभी देवों को परास्त कर भाग दिया और इन्द्र देव को अपना बंधक बना लिया। सभी देवता अपनी इस समस्या को लेकर भगवान शिव के पास गए और तब भगवान शिव ने उन्हें क्षीरसागर में भगवान श्री विष्णु के पास जाकर उनसे सहायता मांगने का आदेश दिया। 
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सभी देवता क्षीरसागर पहुंचे और श्रीविष्णु से अपनी व्यथा बताई। भगवान विष्णु ने स्वयं रणभूमि में जाकर असुर मुरु से युद्ध आरंभ किया। कहते हैं यह युद्ध दस हजार वर्षों तक चला। सभी दैत्य सेन मारी गई लेकिन मुरु ने हार नहीं मानी और घायल होने के बाद भी श्री विष्णु से युद्ध करता रहा। भगवान विष्णु ने जब मुरु को घायल अवस्था में देखा तो वे बद्रिकाश्रम की हेमवती नामक गुफा में विश्राम करने चले गए।
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जब श्रीविष्णु  योगनिद्रा में थे तब मुरु उनका पीछा करते हुए वहां पहुंचा और जैसे ही उसने भगवान को मारने का प्रयास किया तभी वहां एक प्रकाश पुंज उत्पन्न हुआ। उस पुंज से एक देवी प्रकट हुईं और उस देवी ने मुरु असुर का  वध कर दिया।


जिससे एकादशी देवी प्रकट हुई और देवी ने उस दैत्य का वध कर दिया। मान्यता है कि वह देवी श्री विष्णु के शरीर से उत्पन्न हुई थी। विष्णु भगवान ने उस देवी को वरदान देते हुए कहा कि जो लोग माया मोह में बंधे हुए हैं उन्हें मुझ तक लाने में तुम सहायक होगी। तुम्हारी पूजा अर्चना करने वाले भक्त हमेशा सुखी और समृद्ध रहेंगे। कहते हैं तभी से  एकादशी देवी के रूप में उनकी पूजा अर्चना होती है। 

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