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Utpanna ekadashi 2021: इस दिन है उत्पन्ना एकादशी, यहां जानिए उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा

Thu, 25 Nov 2021 08:38 PM IST
शशि सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: शशि सिंह Updated Thu, 25 Nov 2021 08:38 PM IST
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Utpanna ekadashi 2021 date shubh muhurat konw the story of utpanna ekadashi katha
Ekdashi Katha - फोटो : istock

Utpanna Ekadashi 2021: हिन्दू धर्म में एकदशी के सभी व्रतों में श्रेष्ठ व्रत माना गया है। सभी एकादशी श्री हरि को समर्पित होती हैं परंतु हर एक एकादशी का अपना एक अलग फल और महत्व होता है। इन्हीं एकादशी तिथियों में से उत्पन्ना एकादशी व्रत का बड़ा महत्व माना गया है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस बार उत्पन्ना एकादशी व्रत 30 नवंबर 2021 दिन मंगलवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति उत्पन्ना एकादशी का व्रत करता है, उसे भगवान श्री हरि विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी की व्रत का शुभ मुहूर्त व कथा।

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धार्मिक कथाओं के अनुसार माना जाता है कि स्वयं श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को एकादशी माता के जन्म की कथा सुनाई थी। एकादशी की कथा के अनुसार, सतयुग के समय मुर नाम का राक्षस था। उसने अपनी राक्षसी शक्तियों का प्रयोग करके से स्वर्ग लोक पर अपना आधिपत्य कर लिया था। ऐसे में इंद्रदेव और अन्य देवताओं ने विष्णुजी से मदद मांगी। इसके बाद श्री हरि भगवान विष्णु और मुर दैत्य के मध्य युद्ध आरंभ हो गया,  यह युद्ध कई वर्षों तक चलता रहा अंत में विष्णु जी को निद्रा आने लगी तो वे बद्रिकाश्रम में हेमवती नामक गुफा में विश्राम करने चले गए। 
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मुर राक्षस भी उनके पीछे वहां पहुंच गया और सोते हुए भगवान को मारने के लिए जैसे ही सज्ज हुआ वैसे ही भगवान विष्णु के भीतर से एक कन्या देवी प्रकट हुई और उसने मुर से युद्ध किया। घमासान युद्ध के बाद कन्या ने मुर का मस्तक धड़ से अलग कर दिया गया। जब विष्णु की नींद टूटी तो उन्हें आश्चर्य हुआ कि यह कैसे हुआ? कन्या ने सब विस्तार से बताया। वृत्तांत जानकर विष्णु ने कन्या को वरदान मांगने के लिए कहा। 
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कन्या ने मांगा कि अगर कोई मनुष्य मेरा उपवास करे तो उसके सारे पाप नष्ट हो जाएं और उसे बैकुंठ लोक की प्राप्ति हो। तब भगवान ने उस कन्या को एकादशी नाम दिया और वरदान दिया कि इस व्रत के पालन से मनुष्य जाति के पापों का नाश होगा और उन्हें विष्णु लोक मिलेगा।

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