फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Tulsi Puja Importance Kartik Month Upay Remedies For Maa Laxmi Blessings On Kartik

Kartik Purnima 2022: कार्तिक माह में तुलसी का रोपण, दान और पूजन से जीवन के कष्ट हो जाते हैं दूर

Sun, 30 Oct 2022 01:31 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 30 Oct 2022 01:31 PM IST
सार

भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की कोई भी पूजा तुलसी दल के बिना पूरी नहीं मानी जाती है। वहीं हनुमान जी को भी भोग में तुलसी दल बहुत ही प्रिय होती है।

विज्ञापन
Tulsi Puja Importance Kartik Month Upay Remedies For Maa Laxmi Blessings On Kartik
जहां पर तुलसी लगी हुई होती है वहीं भगवान श्री कृष्ण की समीपता है तथा वहीं ब्रह्मा और लक्ष्मीजी भी सम्पूर्ण देवताओं के साथ विराजमान होते हैं। - फोटो : istock

विस्तार

हिंदू ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार कार्तिक माह में तुलसी पूजन से कई तरह के सकारात्मक बदलाव आते हैं, जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। भगवान नारायण की प्रिय तुलसी को देवी लक्ष्मी का ही रूप माना गया है इसलिए इसे घर में लगाना बेहद शुभ माना गया है। कहा जाता है जहां पर तुलसी का पौधा होता है और उसकी पूजा-सेवा की जाती है, उस घर में लक्ष्मीजी की सदैव कृपा बनी रहती है। शास्त्रों में माना गया है की रविवार, एकादशी और सूर्य व चंद्र ग्रहण के समय तुलसी को जल नहीं चढ़ाना चाहिए, इसके साथ ही इस दिन तुलसी के पत्तों को भी नहीं तोड़ना चाहिए। 
विज्ञापन


तुलसीदल के बिना नहीं लगता है भोग
भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की कोई भी पूजा तुलसी दल के बिना पूरी नहीं मानी जाती है। वहीं हनुमान जी को भी भोग में तुलसी दल बहुत ही प्रिय होती है। पद्मपुराण के अनुसार कलियुग में तुलसी का पूजन, कीर्तन, ध्यान,रोपण और धारण करने से वह समस्त पाप को जलाती है और स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदान करती है। यदि मंजरी युक्त तुलसी पत्रों के द्वारा भगवान श्री विष्णु की पूजा की जाए तो अनंत पुन्यफलों की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन


जहां पर तुलसी लगी हुई होती है वहीं भगवान श्री कृष्ण की समीपता है तथा वहीं ब्रह्मा और लक्ष्मीजी भी सम्पूर्ण देवताओं के साथ विराजमान होते हैं। तुलसीजी के निकट जो स्रोत्र -मंत्र आदि का जप किया जाता है,वह सब अनंत गुना फल देने वाला होता है। पूजा में कभी भी तुलसी के पत्ते और गंगाजल को बासी नहीं माना जाता। ये दोनों चीजें किसी भी परिस्थिति में बासी और अपवित्र नहीं मानी जाती। माना जाता है कि जिन घरों में रोजाना तुलसी की पूजा होती है वहां कभी यमदूत प्रवेश नहीं करते। इसके साथ ही घर की सुख-समृद्धि बनी रहती है। पुराणों में बताया गया है मृत्यु के समय गंगाजल संग तुलसी के पत्ते लेने से आत्मा को शान्ति और स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सेहत को सुधारती है तुलसी-
तुलसी के पौधे में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल व एंटीबायोटिक गुण होते हैं जो संक्रमण से लड़ने में शरीर को सक्षम बनाते हैं। जहां तुलसी का पौधा लगा हुआ होता है वहां के आस-पास की हवा शुद्ध हो जाती है। तुलसी के नियमित सेवन से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह होता है और व्यक्ति की आयु बढ़ती है। संक्रामक रोगों से निपटने के लिए तुलसी बहुत कारगर उपाय है।

Tulsi Vivah 2022: तुलसी विवाह से शुरू हो जाएंगे सब शुभ कार्य, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed