फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   story of saraswati river in shastra puran

इस तरह देवी सरस्वती नदी बनकर धरती पर आई

Wed, 23 Jul 2014 11:37 AM IST
Updated Wed, 23 Jul 2014 11:37 AM IST
विज्ञापन
story of saraswati river in shastra puran

शास्त्रों और पुराणों में सरस्वती को ज्ञान की देवी कहा गया है। ज्ञान की इस देवी ने एक बार ऐसा काम किया जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था।

विज्ञापन


उस एक गलती के कारण देवी सरस्वती को ऐसा शाप मिला कि धरती पर नदी बनकर उतरना पड़ा। इसी शाप का परिणाम था कि यमुना और गंगा भी नदी बन गई और देवी लक्ष्मी विष्णु प्रिय वृंदा यानी तुलसी का पौधा बन गई।

विज्ञापन

किस बात पर गंगा और सरस्वती में हुआ विवाद

story of saraswati river in shastra puran

पुराण की कथा के अनुसार उन दिनों लक्ष्मी, सरस्वती और गंगा भगवान विष्णु के साथ रहा करती थी। एक दिन गंगा ने भगवान विष्णु से कहा कि आप तो लक्ष्मी और सरस्वती से अधिक स्नेह करते हैं।

इसके बाद गंगा और सरस्वती के बीच वाद विवाद होने लगा। दोनों के बीच विवाद गहराता देख विष्णु बैकुंठ से बाहर चले गए।

गंगा और लक्ष्मी को मिला यह कैसा शाप

story of saraswati river in shastra puran

इस बीच देवी लक्ष्मी ने गंगा और सरस्वती को शांत करने का प्रयास किया लेकिन देवी लक्ष्मी को सफलता नहीं मिली। देवी सरस्वती का क्रोध बढ़ता गया।

सरस्वती ने आवेश में आकर देवी लक्ष्मी को शाप दिया कि आप निर्विकार भाव से हमारे विवाद को देख रही हैं इसलिए जड़ पैधा बन जाएं। देवी सरस्वती ने इसके बाद गंगा को शाप दे दिया कि आप नदी बनकर पृथ्वी पर जाओ और पापी मनुष्यों के पाप समेटो।


विज्ञापन

भगवान विष्णु को करना पड़ा यह काम

story of saraswati river in shastra puran

सरस्वी के इस व्यवहार से देवी लक्ष्मी तो शांत रही लेकिन गंगा ने भी क्रोध में आकर सरस्वती को शाप दे दिया कि तुम भी पृथ्वी पर नदी बनकर पापियों के पाप का भागी बनो। इस बीच भगवान विष्णु बैकुंठ लौट आए।

भगवान विष्णु ने जब देवियों के आपस में दिए शाप को जाना तो उन्हें बहुत दुःख हुआ। भगवान विष्णु ने देवियों को समझाकर उनका क्रोध शांत किया तब उन्हें अपनी गलतियों का एहसास होने लगा।

इसलिए सरस्वती और गंगा पृथ्वी से चली जाएगी

story of saraswati river in shastra puran

इसके बाद देवियों ने शाप से मुक्ति का उपाय जानना चाहा। भगवान विष्णु ने कहा कि शाप का फल तो आपको भोगना ही पड़ेगा लेकिन कलियुग के दस हजार वर्ष पूरे होने के बाद आप सभी देवियां पृथ्वी से अपने लोक में आकर वास्तविक स्वरूप में आकर मिल जाएंगी।

इस बीच आपको अपने अंश से नदियों के रूप में अवतरित होना पड़ेगा और देवी लक्ष्मी तुलसी का पौधा बनेंगी। माना जाता है कि देवी सरस्वती अब अपने लोक को लौट चुकी हैं और अब गंगा के स्वर्ग लौटने की तैयारी चल रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed