इस तरह देवी सरस्वती नदी बनकर धरती पर आई
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शास्त्रों और पुराणों में सरस्वती को ज्ञान की देवी कहा गया है। ज्ञान की इस देवी ने एक बार ऐसा काम किया जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था।
उस एक गलती के कारण देवी सरस्वती को ऐसा शाप मिला कि धरती पर नदी बनकर उतरना पड़ा। इसी शाप का परिणाम था कि यमुना और गंगा भी नदी बन गई और देवी लक्ष्मी विष्णु प्रिय वृंदा यानी तुलसी का पौधा बन गई।
किस बात पर गंगा और सरस्वती में हुआ विवाद
पुराण की कथा के अनुसार उन दिनों लक्ष्मी, सरस्वती और गंगा भगवान विष्णु के साथ रहा करती थी। एक दिन गंगा ने भगवान विष्णु से कहा कि आप तो लक्ष्मी और सरस्वती से अधिक स्नेह करते हैं।
इसके बाद गंगा और सरस्वती के बीच वाद विवाद होने लगा। दोनों के बीच विवाद गहराता देख विष्णु बैकुंठ से बाहर चले गए।
गंगा और लक्ष्मी को मिला यह कैसा शाप
इस बीच देवी लक्ष्मी ने गंगा और सरस्वती को शांत करने का प्रयास किया लेकिन देवी लक्ष्मी को सफलता नहीं मिली। देवी सरस्वती का क्रोध बढ़ता गया।
सरस्वती ने आवेश में आकर देवी लक्ष्मी को शाप दिया कि आप निर्विकार भाव से हमारे विवाद को देख रही हैं इसलिए जड़ पैधा बन जाएं। देवी सरस्वती ने इसके बाद गंगा को शाप दे दिया कि आप नदी बनकर पृथ्वी पर जाओ और पापी मनुष्यों के पाप समेटो।
भगवान विष्णु को करना पड़ा यह काम
सरस्वी के इस व्यवहार से देवी लक्ष्मी तो शांत रही लेकिन गंगा ने भी क्रोध में आकर सरस्वती को शाप दे दिया कि तुम भी पृथ्वी पर नदी बनकर पापियों के पाप का भागी बनो। इस बीच भगवान विष्णु बैकुंठ लौट आए।
भगवान विष्णु ने जब देवियों के आपस में दिए शाप को जाना तो उन्हें बहुत दुःख हुआ। भगवान विष्णु ने देवियों को समझाकर उनका क्रोध शांत किया तब उन्हें अपनी गलतियों का एहसास होने लगा।
इसलिए सरस्वती और गंगा पृथ्वी से चली जाएगी
इसके बाद देवियों ने शाप से मुक्ति का उपाय जानना चाहा। भगवान विष्णु ने कहा कि शाप का फल तो आपको भोगना ही पड़ेगा लेकिन कलियुग के दस हजार वर्ष पूरे होने के बाद आप सभी देवियां पृथ्वी से अपने लोक में आकर वास्तविक स्वरूप में आकर मिल जाएंगी।
इस बीच आपको अपने अंश से नदियों के रूप में अवतरित होना पड़ेगा और देवी लक्ष्मी तुलसी का पौधा बनेंगी। माना जाता है कि देवी सरस्वती अब अपने लोक को लौट चुकी हैं और अब गंगा के स्वर्ग लौटने की तैयारी चल रही है।