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Som Pradosh Vrat: सोम प्रदोष व्रत आज, जानिए महत्व, पूजाविधि और व्रत से मिलने वाले लाभ
Mon, 30 Sep 2024 11:28 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 30 Sep 2024 11:28 AM IST
सार
सोम प्रदोष व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है जो मानसिक शांति, परिवारिक सुख और आर्थिक समृद्धि की प्राप्ति चाहते हैं।
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सोमवार पूजा विधि
- फोटो : freepik
विस्तार
Som Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। यह व्रत प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है और जब यह व्रत सोमवार के दिन पड़ता है तब इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है। इस दिन उपवास रखने और शिवजी की आराधना करने से मनुष्य को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।
सोम प्रदोष व्रत का महत्व
सोम प्रदोष व्रत का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है। शिव पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धा और नियम से करता है, उसे भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सोम प्रदोष व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है जो मानसिक शांति, परिवारिक सुख और आर्थिक समृद्धि की प्राप्ति चाहते हैं। इस व्रत से व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और उसे शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शक्ति मिलती है। सोम प्रदोष व्रत का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से पितृ दोष भी दूर होता है। यह व्रत परिवार में सुख-शांति और संपन्नता लाने वाला माना जाता है। इसके अलावा, इस व्रत को करने से जीवन में स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं।
पूजा विधि
सोम प्रदोष व्रत के दिन व्रती को प्रातः काल स्नानकर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प लेते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि पूरे दिन निराहार या फलाहार करके उपवास करना है।
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प्रदोष काल (संध्या के समय) में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस समय में शिवलिंग की पूजा की जाती है। शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, और घी से अभिषेक करें। इसके साथ ही बेलपत्र, धतूरा, और आक के फूल चढ़ाकर भगवान शिव का पूजन करें। शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव को बेलपत्र विशेष रूप से प्रिय होते हैं, अतः उन्हें चढ़ाने से मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।
भगवान शिव की आरती करने के बाद शिव मंत्रों का जाप करें। "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का 108 बार जाप करना विशेष लाभकारी होता है। इसके साथ ही प्रदोष व्रत की कथा का श्रवण अवश्य करें। कथा का श्रवण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
व्रत से मिलने वाले लाभ
सोम प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस व्रत से गृहस्थ जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और आर्थिक समृद्धि आती है। वहीं, रोग और शत्रुओं से भी छुटकारा मिलता है। साथ ही, यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी सहायक होता है। अतः सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक सशक्त साधन है। इसे श्रद्धा और विधिपूर्वक करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है।
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सोम प्रदोष व्रत का महत्व
सोम प्रदोष व्रत का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है। शिव पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धा और नियम से करता है, उसे भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सोम प्रदोष व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है जो मानसिक शांति, परिवारिक सुख और आर्थिक समृद्धि की प्राप्ति चाहते हैं। इस व्रत से व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और उसे शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शक्ति मिलती है। सोम प्रदोष व्रत का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से पितृ दोष भी दूर होता है। यह व्रत परिवार में सुख-शांति और संपन्नता लाने वाला माना जाता है। इसके अलावा, इस व्रत को करने से जीवन में स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं।
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पूजा विधि
सोम प्रदोष व्रत के दिन व्रती को प्रातः काल स्नानकर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प लेते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि पूरे दिन निराहार या फलाहार करके उपवास करना है।
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प्रदोष काल (संध्या के समय) में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस समय में शिवलिंग की पूजा की जाती है। शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, और घी से अभिषेक करें। इसके साथ ही बेलपत्र, धतूरा, और आक के फूल चढ़ाकर भगवान शिव का पूजन करें। शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव को बेलपत्र विशेष रूप से प्रिय होते हैं, अतः उन्हें चढ़ाने से मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।
भगवान शिव की आरती करने के बाद शिव मंत्रों का जाप करें। "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का 108 बार जाप करना विशेष लाभकारी होता है। इसके साथ ही प्रदोष व्रत की कथा का श्रवण अवश्य करें। कथा का श्रवण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
व्रत से मिलने वाले लाभ
सोम प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस व्रत से गृहस्थ जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और आर्थिक समृद्धि आती है। वहीं, रोग और शत्रुओं से भी छुटकारा मिलता है। साथ ही, यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी सहायक होता है। अतः सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक सशक्त साधन है। इसे श्रद्धा और विधिपूर्वक करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है।
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