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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   solar eclipse on 26 dec 2019, know religious story of grahan

26 को लगेगा सूर्य ग्रहण, जानिए क्यों लगता है ग्रहण, क्या होंगे इसके प्रभाव

Sat, 21 Dec 2019 10:49 AM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Sat, 21 Dec 2019 10:49 AM IST
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solar eclipse on 26 dec 2019, know religious story of grahan

सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर 2019 धनु राशि में लगेगा। यह साल का अंतिम सूर्य ग्रहण होगा। भारतीय समयानुसार (26 December 2019 Solar Eclipse in India time) सुबह 08 बजकर 17 मिनट पर लगेगा और 10 बजकर 57 मिनट में समाप्त होगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह सूर्य ग्रहण पौष माह की अमावस्या के दिन मूल नक्षत्र और धनु राशि में लगेगा।

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सूर्यग्रहण - फोटो : सूर्यग्रहण

साल के अंतिम सूर्य ग्रहण का राशियों पर प्रभाव
साल के आखिरी सूर्य ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर शुभाशुभ रूप में पड़ेगा। ग्रहण के प्रभाव जहां मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह और धनु राशि के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। वहीं तुला, कुंभ और मीन राशि वालों के लिए यह ग्रहण शुभ परिणामकारी होने वाला है। जबकि कन्या, वृश्चिक और मकर राशि वालों को गोचर दौरान मिले जुले परिणाम मिल सकते हैं। 

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राहु और केतु
ग्रहण की धार्मिक मान्यता
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब समुद्र मंथन चल रहा था तब उस दौरान देवताओं और दानवों के बीच अमृत पान के लिए विवाद पैदा शुरू होने लगा, तो इसको सुलझाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया। मोहिनी के रूप से सभी देवता और दानव उन पर मोहित हो उठे तब भगवान विष्णु ने देवताओं और दानवों को अलग-अलग बिठा दिया। लेकिन तभी एक असुर को भगवान विष्णु की इस चाल पर शक पैदा हुआ। वह असुर छल से देवताओं की लाइन में आकर बैठ गए और अमृत पान करने लगा।
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राहु और केतु

देवताओं की पंक्ति में बैठे चंद्रमा और सूर्य ने इस दानव को ऐसा करते हुए देख लिया। इस बात की जानकारी उन्होंने भगवान विष्णु को दी, जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से दानव का सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन उस दानव ने अमृत को गले तक उतार लिया था, जिसके कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई और उसके सिर वाला भाग राहू और धड़ वाला भाग केतू के नाम से जाना गया। इसी वजह से राहू और केतु सूर्य और चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं। पूर्णिमा और अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा का ग्रास कर लेते हैं। 

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ग्रहण - फोटो : Pixabay

ज्योतिषीय नजरिए से ग्रहण
ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह माना जाता है। अगर किसी की कुंडली में राहु-केतु बुरे भाव में जाकर बैठ जाता है तो उसको जीवन में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इनकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सूर्य और चंद्रमा भी इसके प्रभाव से नहीं बच पाते।

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