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आज है शनिदेव का जन्म दिन, ऐसे पाएं शनि दोष से मुक्ति
राकेश/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 07 Jun 2013 05:32 PM IST
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ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या तिथि के दिन शनि देव का जन्म दिवस मनाया जाता है। आज यह तिथि होने से देश भर के शनि मंदिरों में शनि देव की विशेष पूजा अर्चना की जा रही है। ज्योतिषशास्त्री प्रवीण पुरोहित के अनुसार शनिवार के दिन पड़ने वाली अमवस्या शनिश्चरी अमवस्या कहलाती है। इस पर सोने पर सुहागा यह है कि इस दिन शनि जयंती भी है जिससे शनि शांति के लिए आज का दिन बहुत ही उत्तम है।
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शनि देव को ऐसे खुश करें
कन्या, तुला एवं वृश्चिक राशि वालों के लिए यह दिन बहुत ही खास है। इन तीनों राशियों पर इन दिनों शनि की साढ़ेसाती चल रही है। इसके अलावा कर्क एवं मीन राशि वालों की ढैय्या चल रही है।
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इन पांचों राशि वालों को इस सुअवसर का लाभ उठाना चाहिए। शनि की शांति के लिए शनि पीड़ित व्यक्तियों को सात साबूत बादाम शनि मंदिर में जाकर चढ़ाना चाहिए। कच्चा नारियल एवं काली बाती में तिल के तेल का दीपक जलाने से भी शनि प्रसन्न होते हैं।
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इस दिन महाराज दशरथ द्वारा लिखा गया शनि स्तोत्र का ग्यारह बार पाठ करने से कुण्डली में मौजूद शनि का अशुभ प्रभाव दूर होगा। जिन कन्याओं के विवाह में शनि दोष के कारण विलंब हो रहा है। ऐसी कन्याओं के अभिभावक को काले रंग का चमड़े का जूता किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करना चाहिए।
शनिवार के दिन शनि देव पीपल में स्थित होते हैं इसलिए सुबह पीपल के वृक्ष की पूजा करें। इसकी जड़ों में सरसों तेल का एक दीपक जलाकर शनि देव का ध्यान करें और चिटियों को आटा एवं चीनी मिलाकर दें।
शनि के विषय में मान्यता है कि इनकी पूजा कभी भी सामने से नहीं करनी चाहिए इससे शनि की वक्र दृष्टि का प्रभाव पड़ता जो शुभ नहीं माना जाता है। इसलिए इनकी पूजा करते समय हमेशा तिरछा खड़े रहें। तिल, उड़द, काला कंबल, बादाम, लोहा, कोयला इन वस्तुओं पर शनि का प्रभाव होता है।
व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार संध्या के समय इनका दान करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार जहां सभी देवी-देवताओं की पूजा सुबह में होती है वहीं शनि ऐसे देवता हैं जिनकी पूजा संध्या के समय अधिक फलदायी होती है। इसलिए शाम के समय मंदिर जाएं और शनि को तिल एवं तेल अर्पित करके खुशहाल जीवन की कामना करें।