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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Sawan 2nd Somwar 2022 om jai shiv omkara aarti lyrics in hindi

Sawan 2nd Somwar: आज है सावन का दूसरा सोमवार, मनोकामना पूर्ति के लिए इस विधि से करें शिव जी की आरती

Mon, 25 Jul 2022 10:27 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Mon, 25 Jul 2022 10:27 AM IST
सार

Shiv Ji Ki Aarti : सावन सोमवार के दिन व्रत रख कर महादेव की आराधना करने से भक्तों के सभी कष्ट मिट जाते हैं। साथ ही इस दिन पूजा के दौरान के शिव जी की आरती करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 
 

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Sawan 2nd Somwar 2022 om jai shiv omkara aarti lyrics in hindi
मनोकामना पूर्ति के लिए इस विधि से करें शिव जी की आरती - फोटो : istock

विस्तार

Shiv Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi : आज सावन माह का दूसरा सोमवार है। आज के दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा अर्चना की जाती है। श्रद्धालु आज शिवालयों में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन-अर्चन कर उन्हें प्रसन्न कर रहे हैं। सावन महीने का प्रत्येक सोमवार व्रत और पूजा के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। कहा जाता है कि सावन सोमवार के दिन व्रत रख कर महादेव की आराधना करने से भक्तों के सभी कष्ट मिट जाते हैं। साथ ही उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन पूजा के दौरान के शिव जी की आरती करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यहां शिवजी की आरती दी जा रही है, जिसकी मदद से आज आप पूजा के दौरान पढ़ सकते हैं... 

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शिवजी की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

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