तिलक लगाने के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे आप, ये है तिलक से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी
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हिंदू सनातन धर्म में तिलक लगाने की परंपरा बहुत पहले से चली आ रही है। लोग पूजा-पाठ के बाद अपने इष्ट देव के नाम का तिलक लगाते हैं। हिंदू धर्म में धार्मिक और शुभ कार्यों में तिलक बहुत ही आवश्यक माना जाता है। हिंदू धर्म में तीज त्योहारों आदि पर भी तिलक अवश्य किया जाता है। भाई दूज औऱ रक्षाबंधन पर तो तिलक करने की परंपरा है। कुमकुम, रोली, सिंदूर, चंदन भस्म आदि कई चीजों से तिलक किया जाता है। तो चलिए जानते हैं तिलक के बारे में ये है महत्वपूर्ण जानकारी....
12 स्थानों पर लगाया जाता है तिलक
ज्यादातर लोग केवल माथे पर ही तिलक लगाते हैं लेकिन हिन्दू परंपरा में सिर, मस्तक, गले, हृदय, दोनों बाजू, नाभि, पीठ, दोनों बगल आदि मिलाकर शरीर के कुल 12 स्थानों पर तिलक लगाने का विधान बताया गया है।
- तिलक हमेशा ईश्वर के नाम से लगाया जाता है इसलिए तिलक लगाने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए।
- तिलक हमेशा उत्तर दिशा की ओर मुख करके लगाना चाहिए।
- प्रातः और संध्या हवन करने वालों को तिलक लगाकर ही हवन करना चाहिए। बिना तिलक के फल प्राप्त नहीं होता है।
- श्वेत चंदन, लाल चंदन, कुमकुम, हल्दी, भस्म, आदि का तिलक करना शुभ है।
- भस्म से त्रिपुंड नहीं लगाना चाहिए।
- तिलक हमेशा ललाट बिंदु यानि बिलकुल भौहों के मध्य भाग में ही लगाना चाहिए।
- भगवान को तिलक हमेशा अनामिका उंगली से लगाया जाता है। इस उंगली से तिलक लगाने से शांति मिलती है।
- मध्यमा से तिलक लगाने से आयु वृद्धि होती है।
- अंगूठे से तिलक करना पुष्टिदायक है।
- शुभ और वैदिक कार्यों में अनामिका उंगली से तिलक किया जाता है।
- पितृ कार्यों में तिलक के लिए मध्यमा उंगली का प्रयोग करते हैं।
- ऋषि कार्यों में कनिष्ठिका यानि सबसे छोटी उंगली से तिलक करते हैं।
- तंत्र पूजा में तिलक के लिए तर्जनी उंगली का प्रयोग किया जाता है।