नहीं जानते होंगे, भारत में भी मौजूद है रावण की एक लंका
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीलंका के बारे में कहा जाता है कि यह रावण की नगरी थी। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि रावण की एक नगरी लंका भारत में भी है। बुंदेलखंड के प्रवेश द्वार ‘कालपी’ के बारे में विख्यात है कि यह अनेको ऋषियों महार्षियों की तपोभूमि रही है। वाल्मीकि, पराशर, वेदव्यास आदि ऋषियों के आश्रम यहां स्थित थे।
महाभारत मौलिक जीवन का दर्शन कराता है। कालपी के उत्तर पश्चिम में मदारपुर के पास व्यास क्षेत्र है। यहां यमुना में अच्छोर नामक एक नाला मिलता है इस नाले का पुराना नाम ‘व्यास गंगा’ है। इसी क्षेत्र में कालप्प देव का टीला है। कालपी में स्थित रावण की लंका के नाम से विख्यात एक मीनार भी है।
देखिए क्या है यहां की खूबी
यहां एक विशाल परिसर में ऊंचे चबूतरे पर स्थित मीनार है, इसके प्रवेश द्वारों पर नाग-नागिन अपने फन फैलाए छाया किए हैं। दांई ओर विशाल नाग है तथा के बाईं ओर चित्रगुप्त, शनिदेव और शिव मंदिर है।
मंदिर में सत्ताइस नक्षत्रों, बारह अवतारों, चार युगों तथा सभी ग्रहों की संगमरमर की आकर्षक प्रतिमाएं है। प्रवेश द्वार के दांई ओर एक छोर पर लंकामीनार है।
लंका मीनार के पास कुभकर्ण की लगभग 60 फीट लेटी हुई तथा मेघनाद की बैठी हुई मुद्रा में विशाल प्रतिमाएं हैं। सम्राट हर्षवर्धन के जरिए बनाया गया श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।