Ratan Tata Death: नहीं रहे दिग्गज कारोबारी रतन टाटा, जानिए पारसी धर्म में कैसे किया जाता है अंतिम संस्कार
दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा का संबंध एक पारसी से समुदाय था। लेकिन आज पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार पारसी धर्म के रीति-रिवाज के बजाय हिंदू रीति-रिवाज से किया जाएगा।
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Ratan Tata Death: देश के जाने-माने उद्योगपति, समाजसेवी और टाटा ग्रुप के मानद चेयरमैन रतन नवल टाटा का बुधवार, 9 अक्तूबर देर रात निधन हो गया। मशहूर उद्योगपति रतन टाटा 86 साल के थे। रतन टाटा पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे और मुंबई के अस्पताल में इलाज चल रहा था। दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा का संबंध एक पारसी से समुदाय था। लेकिन आज पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार पारसी धर्म के रीति-रिवाज के बजाय हिंदू रीति-रिवाज से किया जाएगा। दिवंगत रतन टाटा का संस्कार विद्घत शवदाह गृह में किया जाएगा। पारसी धर्म में मृत शरीर का अंतिम संस्कार अलग प्रक्रिया से किया जाता है। हिंदू धर्म में जहां शव को जलाया जाता है तो वहीं मुस्लिम समाज में शव को जमीन में दफनाया जाता है। लेकिन पारसी धर्म में शव को न तो जलाया जाता है और न ही दफनाया जाता है। आइए जानते हैं पारसी समुदाय में मृत्यु होने के बाद शव का अंतिम संस्कार कैसे किया जाता है।
पारसी धर्म में क्या है अंतिम संस्कार की मान्यताएं
देश में पारसी धर्म को मनाने वालों की संख्या बहुत ही कम है। पारसी धर्म में जब किसी की मृत्यु होती है तो अंतिम संस्कार करने का तरीका अन्य धर्म से एकदम अलग तरीके से किया जाता है। जब भी पारसी समुदाय के किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसके शव को न तो दफनाया जाता है और न ही जलाया जाता है, बल्कि शव को टावर ऑफ साइलेंस, जिसे पारसी में दखमा कहा जाता है वहां ले जाया जाता है और अंतिम संस्कार किया जाता है।
पारसी धर्म में यह मान्यता है कि जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो मृत शरीर अशुद्ध हो जाता है। पारसी धर्म में पृथ्वी, पानी और अग्नि को बहुत ही पवित्र माना जाता है, ऐसे में जब मृत शरीर को अग्नि में जलाया जाता है या जमीन में दफनाया जाता है, या फिर जल में प्रवाहित किया जाता है तो उससे अग्नि, जल और पृथ्वी के तत्व अपवित्र हो जाते हैं। इस कारण से पारसी समुदाय के लोग शव को न तो जलाते है और न ही दफनाया जाता जाता है।
टावर ऑफ साइलेंस में कैसे होता अंतिम संस्कार
पारसी समुदाय में शवों को जलाने या दफनाने के बजाय शव को टावर ऑफ साइलेंस में रख दिया जाता है। टावर ऑफ साइलेंस पारसी समुदाय के शव का अंतिम संस्कार करने के विशेष जगह होती है, जिसमें यह टावर ऑफ साइलेंस एक ऊंचाई में बना गोलाकार स्थान होता है जिसे पारसी भाषा में दखमा कहते हैं। जहां पर शवों को खुले में रख दिया जाता है और गिद्ध और चील जैसे कई पक्षी मृतक शरीर को खाते हैं
यह परंपरा सदियों से पारसी समुदाय के लोग निभाते आ रहे हैं। पारसी धर्म में अंतिम संस्कार की यह परंपरा करीब 3 हजार सालों से चली आ रही हैं। लेकिन पिछले कई सालों से लगातार गिद्धों की संख्या में कमी आने के कारण पारसी समुदाय के लोगों को अंतिम संस्कार करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिसके चलते पारसी धर्म के लोग श्मशान घाट या विद्धत शवदाह गृह में करने लगे हैं।
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