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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Rama Ekadashi 2024 Date Time Puja Muhurat Bhog during puja and its significance

Rama Ekadashi 2024: रमा एकादशी आज , भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए इन चीजों का लगाएं भोग

Mon, 28 Oct 2024 07:32 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 28 Oct 2024 07:32 AM IST
सार

Rama Ekadashi 2024 Bhog:इआज यानी 28 अक्तूबर को रमा एकादशी है। रमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करते समय केसर वाली खीर, चने के लड्डू, चने की पंजीरी, बेसन का हलवा, बेसन के लड्डू आदि का भोग लगाना चाहिए। भोग बनाते समय उसमें तुलसी के पत्ते डालने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

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Rama Ekadashi 2024 Date Time Puja Muhurat Bhog during puja and its significance
कार्तिक मास की एकादशी को रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है। - फोटो : amar ujala

विस्तार

Rama Ekadashi 2024 Bhog: आज रमा एकादशी है। कार्तिक माह में लक्ष्मी नारायण और तुलसी के पौधे की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। मासिक कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की एकादशियां भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा के लिए बहुत खास होती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और व्रत करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। साधक सभी चिंताओं और कष्टों से मुक्त हो जाता है। इस साल पंचांग में तारीखों के घटने-बढ़ने की वजह से मतभेद हैं। दिवाली की तारीख को लेकर पंचांगों में भी मतभेद हैं।  आइए जानते हैं कि किस दिन रमा एकादशी का व्रत होता है और उस दिन कौन से कार्य करने से शुभ फल मिलता है। 
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द्रिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 27 अक्टूबर 2024 को सुबह 7:15 बजे शुरू होगी और 28 अक्टूबर 2024 को सुबह 8:40 बजे समाप्त होगी। एकादशी पर्व पर सूर्योदय का विशेष महत्व होता है। 27 अक्टूबर को सूर्योदय के बाद एकदाशी शुरू होगी। वहीं, 28 अक्टूबर को सूर्योदय केवल एकादशी के दिन ही होगा। एकादशियों और द्वादशी तिथि के संयोग में एकादशी व्रत करना शुभ फलदायी माना जाता है। इसलिए इस साल कार्तिक माह में रमा-एकादशी का व्रत 28 अक्तूबर को रखा जाएगा। 
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रमा एकादशी के दिन इन चीजों का लगाएं भोग
रमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करते समय केसर वाली खीर, चने के लड्डू, चने की पंजीरी, बेसन का हलवा, बेसन के लड्डू आदि का भोग लगाना चाहिए। इसके अलावा भोग के तौर पर आप नारियल की बर्फी, नारियल की खीर और नारियल का हलवा भी चढ़ा सकते हैं। देवी लक्ष्मी को सफेद मिठाई पसंद है इसलिए आप रसगुल्ला और रसमलाई या बर्फी का भोग लगा सकते हैं। भोग बनाते समय उसमें तुलसी के पत्ते डालने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होंगे और आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करेंगे।
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रमा एकादशी पर न करें ये कार्य 
  • रमा एकादशी के दिन झूठ बोलना, ईर्ष्या, क्रोध और दूसरों को डांटना वर्जित है।
  • इस दिन मूली, बैंगन, प्याज, लहसुन आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। 
  • एकादशी के दिन भूलकर भी तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए और तुलसी को जल भी नहीं चढ़ाना चाहिए। 
  • एकादशी के दिन यदि आप व्रती हैं तो दिन में सोना वर्जित है। 
  • इस दिन पान नहीं खाना चाहिए। 
  • इस दिन काले कपड़े पहनना शुभ नहीं माना जाता है। 
  • इस दिन चावल खाना विशेष रूप से वर्जित है। 
  • एकादशी के दिन नाखून और बाल काटने की भी मनाही होती है।
रमा एकादशी  व्रत नियम
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करें। 
  • तुलसी के पौधे को जल चढ़ाएं और दीपक जलाएं।
  • रमा एकादशी के दान करना बहुत शुभ माना जाता है। आप अन्न, वस्त्र या धन का दान कर सकते हैं।
  • इस दिन उपवास रखना बेहद शुभ माना जाता है। आप फलाहार या केवल फल का सेवन कर सकते हैं।
  • पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्र ॐ नमो नारायणाय का जाप करें। 
  • रमा एकादशी की कथा सुनने से मन शांत होता है और पुण्य मिलता है। 

एकादशी  अक्तूबर 2024
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि आरंभ: 27 अक्तूबर, रविवार,  प्रातः  5:23 बजे से 
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त: 28 अक्टूबर, सोमवार,  प्रातः 10:31 बजे  ऐसे में आखिरी एकादशी व्रत अक्टूबर माह में होगा। उदया तिथि क अनुसार 28 अक्तूबर का रमा एकादशी मनाई जाएगी। 


2 शुभ योग में रमा एकादशी 
रमा एकादशी के दिन दो शुभ योग का निर्माण हो रहा है। पहला ब्रह्म योग सुबह 6 बजकर 48 मिनट तक रहेगा और उसके बाद ऐंद्र योग आरंभ होगा जो पूरे दिन रहेगा। इस दिन पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र दोपहर 3: 24 मिनट तक है और उसके बाद उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र शुरू हो जाएगा। 

रमा एकादशी पूजा मुहूर्त
रमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा सूर्योदय के समय प्रातः 06:30 बजे से कर सकते हैं। 

रमा एकादशी का शुभ चौघड़िया मुहूर्त
चर-सामान्य मुहूर्त: प्रातः 06:24 से प्रातः 07:49 तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त: प्रातः07:49 से प्रातः 09:15 तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: प्रातः 09:15 से प्रातः10:40 तक
शुभ-उत्तम मुहूर्त: दोपहर 12:06 से दोपहर 01:31 तक
चर-सामान्य मुहूर्त: सायं 04:23 से  सायं 05:48 तक



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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