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पीएम मोदी की काशी के कोतवाल के सामने हाजिरी, जानिए काल भैरव मंदिर की मान्यताएं
Fri, 26 Apr 2019 11:39 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Fri, 26 Apr 2019 11:39 AM IST
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काशी के कोतवाल काल भैरव
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी के दौर पर हैं। जहां से वह आज अपना नामांकन दाखिल करने वाले हैं। नामांकन दाखिल करने से पहले प्रधानमंत्री मोदी काशी के कोतवाल काल भैरव की पूजा की। मान्यता है कि काशी में किसी भी शुभ कार्य करने से पहले और यहां पर रहने के लिए काशी के कोतवाल काल भैरव की आज्ञा लेनी पड़ती है।
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भगवान शिव के रुद्र अवतार बाबा कालभैरव का काशी से बहुत गहरा लगाव है। मान्यता के अनुसार भगवान शिव की नगरी काशी में काल भैरव की नियुक्ति स्वयं भगवान भोलेनाथ ने की थी। भोलेनाथ काशी के राजा और काल भैरव वाराणसी के कोतवाल है। बनारस में रहने के लिए सबसे पहले काल भैरव की आज्ञा लेनी पड़ती है। आइए जानते कालभैरव मंदिर की मान्यताएं।
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कालभैरव मंदिर की मान्यताएं
भगवान भैरव का दर्शन किये बगैर बाबा विश्वनाथ का दर्शन अधूरा माना जाता है। काल भैरव को काशी के कोतवाल कहे जाने के पीछे एक अत्यंत रोचक कथा है। शिवपुराण के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी में बड़ा कौन को लेकर विवाद पैदा हो गया। इसी बीच ब्रह्माजी ने भगवान शंकर की निंदा कर दी, जिसके चलते भगवान शिव बहुत क्रोधित हो गए और उनके क्रोध से ही भगवान काल भैरव का प्राकट्य हुआ। इसके बाद भगवान शिव की आज्ञा पर काल भैरव ने अपने नाखूनों से ब्रह्माजी का पांचवा सिर काट दिया। इससे उन्हें ब्रह्रा हत्या का पाप लगा।
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ब्रह्रा हत्या के पाप से मुक्ति के लिए भगवान शंकर ने काल भैरव को पृथ्वी पर जाकर प्रायश्चित करने के लिए कहा। देवाधिदेव शिव ने उन्हें बताया कि जब ब्रह्रमा जी का कटा हुआ सिर उनके हाथ से गिर जाएगा, उसी समय वे ब्रह्रा हत्या के पाप से मुक्त हो जाएंगे। मान्यता है कि पृथ्वी पर उनकी यह यात्रा काशी में जाकर समाप्त हुई। इसके बाद भगवान भैरव यहीं स्थापित हो गए और काशी के कोतवाल कहलाए।