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महाभारत का यह योद्धा जिसने मृत्यु के बाद वापस आकर किया था पितरों का तर्पण
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 29 Sep 2018 02:08 PM IST
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पितृ पक्ष 2018
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इस समय श्राद्ध पक्ष चल रहे हैं जो 9 अक्टूबर को समाप्त होगा। 16 दिन पितृपक्ष चलते हैं। इन महत्वपूर्ण दिनों में मृतात्माओं के नाम पर श्रद्धा पूर्वक दिया गया अन्न-जल, वस्त्र ब्राह्मणों को दिया जाता है, वह सूक्ष्म रूप से उन्हें प्राप्त हो जाता है और पितृ लोग संतुष्ट होकर पूरे वर्ष आशीष की वर्षा करते रहते हैं।
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श्राद्ध को लेकर महाभारत के योद्धा कर्ण के बारे में एक कथा प्रचलित है। जिसमें कहा गया है कि जब कर्ण की मृत्यु होने के बाद उनकी आत्मा स्वर्ग लोक में पहुंची तो वहां पर उन्हें भोजन में खाने के लिए ढ़ेर सारा सोना और सोने से बने आभूषण दिए गए। तब कर्ण की आत्मा को कुछ समझ में नहीं आया। तब कर्ण की आत्मा ने देवराज इंद्र से पूछा कि उन्हें खाने में सोने की चीजें क्यों दी जा रही है।
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कर्ण के सवाल के जवाब में देवराज इंद्र ने बताया की तुमने अपने जीवन काल में सोना ही दान किया था। कभी भी अपने पूर्वजों को खाना की चीजों का दान उन्हें नहीं दिया इस कारण से तुम्हें भी सोना ही खाने को दिया गया। इस पर कर्ण ने कहा कि मुझे अपने पूर्वजों के बारे में कुछ भी मालूम नहीं था इसलिए उन्हें कुछ भी दान नहीं कर पाया।
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तब स्वर्ग से कर्ण को अपनी गलती सुधारने के लिए मौका दिया गया और उन्हें दोबारा 16 दिनों के लिए वापस पृथ्वी पर भेज गया। इसके बाद 16 दिनों तक कर्ण ने अपने पूर्वजों को याद करते हुए उन्हें भोजन अर्पित किया। तब से इसी 16 दिनों को पितृ पक्ष कहा जाने लगा।