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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Pitru Paksha 2024 know how to perform Shradh for couples who do not have children

Pitru Paksha 2024: जिन दंपति के संतान नहीं है किस विधि से करें उनका श्राद्ध

Fri, 20 Sep 2024 11:00 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 20 Sep 2024 11:00 AM IST
सार

 शास्त्रों के अनुसार, पुत्र ही पिता का श्राद्ध-कर्म करता है। ऐसे में जो लोग निस्संतान थे, उन्हें तृप्ति कैसे मिलेगी? शास्त्रों ने उनके लिए भी कुछ विधान बताए हैं।

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Pitru Paksha 2024 know how to perform Shradh for couples who do not have children
पितृ पक्ष 2024 - फोटो : amar ujala

विस्तार

Nisantan Dampati ka Kaise Karein Shradh: पुत्र कर्तव्यों को पूर्ण कर पिता का अन्वर्थ ‘पु’ नामक नरक से ‘त्र’ त्राण करने वाला पुत्र बनूंगा। माता-पिता का श्राद्ध पुत्र का कर्तव्य पूर्ण करूंगा। शास्त्रों के अनुसार, पितृ ऋण से मुक्ति पाने का उपाय है श्राद्ध-कर्म। श्राद्ध-कर्म करने से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है। श्राद्ध माता-पिता, गुरुजनों की आज्ञा का पालन करने वाला उनकी मृत्यु उपरांत और्ध्व दैहिक संस्कार, पिंड पत्तल, ब्राह्मण भोज आदि कार्य करने तथा गया जी तीर्थ जाकर पिंडदान करने से पुत्रता सिद्ध होती है। मगर सवाल यह है कि जो लोग निस्संतान हैं, उनको कैसे तृप्ति मिलेगी? तो इनके लिए भी शास्त्रों में कुछ विधान दिए गए हैं।
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नि: संतान स्त्री-पुरुष का श्राद्ध
जहां तक नि: संतान के श्राद्ध का संबंध है, तो सगे-भाइयों में से किसी का पुत्र उस निस्संतान स्त्री या पुरुष का श्राद्ध कर सकता है।  इसी प्रकार यदि भाइयों में केवल एक भाई विवाहित हो और उसके कोई संतान न हो, तो उसकी स्त्री या पत्नी का श्राद्ध दूसरे अविवाहित भाई यानी देवर कर सकता है। किंतु भाई-भाभी के बच्चे, स्त्री के भाई मुक्ति श्राद्ध नहीं कर सकते।
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कुछ बातों का रखें विशेष ध्यान
  • सूर्य उदय के साथ स्नान आदि कर शुद्ध धुले वस्त्र पहनकर एक लोटा जल पीपल के वृक्ष पर चढ़ाएं। 
  • तीर्थ पितृ स्तोत्र का पाठ करें, इससे भी पितर प्रसन्न होते हैं। यदि पितृपक्ष के सोलह दिन ऐसा करेंगे, तो और भी शुभ होगा। 
  • पितृ श्राद्ध अपराह्य काल में करें, क्योंकि शाम और रात्रि के समय श्राद्ध करना वर्जित है।
  • श्राद्ध वाले दिन स्त्री समागम, दूसरों से अन्न या जल लेना, तेल लगाना आदि से बचना चाहिए। शुद्ध आचरण और पवित्र विचार रखना चाहिए।
  • हमारे पितृ श्राद्ध करने अर्थात भोजन कराने से प्रसन्न होते हैं। इसलिए श्राद्ध जिसका भी कर रहे हैं, ध्यान रखें कि उसको भोजन में क्या-क्या पसंद है। उसकी पसंद का भोजन बनाना शुभ रहता है। 
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  • ब्रह्म भोज से पहले गाय, कुत्ते, पक्षी आदि के लिए बनाए गए भोजन में से संकल्प कर उन्हें खिलाएं। फिर ब्राह्मण भोज कराएं। 
  • गाय, कुत्ते, पक्षी या ब्राह्मण के भोजन का संकल्प दक्षिण मुख कर करना चाहिए, क्योंकि पितरों का निवास दक्षिण दिशा में माना गया है।
  • ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीहरि के पसीने से तिल और रोम से कुश की उत्पत्ति हुई है। इसलिए तिल और कुश का उपयोग तर्पण में नित्य करना चाहिए। सफेद चंदन और सफेद पुष्प का प्रयोग करें।
  • तर्पण करते समय अंगूठे से ही पिंड पर जलांजलि समर्पित करें। ऐसी मान्यता है कि अंगूठे से दी गई जलांजलि पितरों तक पहुंचती है।
  • बच्चों और सन्यासियों के लिए पिंडदान नहीं किया जाता, अर्थात श्राद्ध उन्हीं का होता है, जिनको मैं और मेरे की आसक्ति होती है।
  • श्राद्ध संपन्न होने पर कौवे, गाय, कुत्ते, चींटी और भिखारी को भी यथा नियम भोजन वितरित करना चाहिए। 
  • पितृपक्ष में अपने पितरों के निमित्त जो अपनी शक्ति सामर्थ्य के अनुरूप शास्त्र विधि से श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करता है, उसके सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं और घर, परिवार व्यवसाय तथा आजीविका में हमेशा उन्नति होती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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