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Papankusha Ekadashi 2023: पापाकुंशा एकादशी आज, जानिए पूजाविधि, महत्व और कथा
Wed, 25 Oct 2023 10:32 AM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 25 Oct 2023 10:32 AM IST
सार
आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 अक्टूबर को दोपहर 03 बजकर 14 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानी 25 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी।
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Kamada Ekadashi Vrat 2023: एकादशी व्रत के समान अन्य कोई व्रत नहीं है। इस एकादशी में भगवान पद्मनाभ का पूजन और अर्चना की जाती है
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पापाकुंशा एकादशी व्रत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन किया जाता है। इस दिन सृष्टि के पालनहार श्री विष्णु भगवान कि पूजा की जाती है। इस वर्ष 25 अक्तूबर, बुधवार को यह व्रत किया जाएगा। एकादशी के जिस व्रत से पापों पर अंकुश लग जाए तो उस व्रत को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है। वनवास से लौटने के बाद भगवान राम और उनके भाई भरत का मिलाप भी इसी एकादशी तिथि को हुआ था, इस वजह से इस तिथि का महत्व और भी बढ़ जाता है।
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पापाकुंशा एकादशी का महत्व
इस एकादशी व्रत के समान अन्य कोई व्रत नहीं है। इस एकादशी में भगवान पद्मनाभ का पूजन और अर्चना की जाती है, जिससे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। पापाकुंशा एकादशी हजार अश्वमेघ और सौ सूर्ययज्ञ करने के समान फल प्रदान करने वाली होती है।पदम् पुराण के अनुसार जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा पूर्वक सुवर्ण,तिल,भूमि,गौ,अन्न,जल,जूते और छाते का दान करता है,उसे यमराज के दर्शन नही होते। इसके अतिरिक्त जो व्यक्ति इस एकादशी की रात्रि में जागरण करता है वह स्वर्ग का भागी बनता है। इस एकादशी के दिन दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
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पापाकुंशा एकादशी पूजन विधि
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखकर पूजा करनी चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा के लिए ईशान कोण श्रेष्ठ माना गया है। भगवान विष्णु को चन्दन,अक्षत,मोली,फल,फूल,मेवा आदि अर्पित करें। इसके बाद घी के दीपक जलाएं और उनका भोग लगाकर आरती उतारें। भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए पापाकुंशा एकादशी की कथा सुननी चाहिए,एवं 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जितना संभव हो जप करें। इस दिन एक समय फलाहार किया जाता है। एकादशी पर दान-पुण्य जरूर करना चाहिए। शाम के समय भी भगवान की आरती उतारें और ध्यान व कीर्तन करें। व्रत के अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों को भोजन और अन्न का दान करने के बाद व्रत का पारण करना चाहिए।
पापाकुंशा एकादशी कथा
प्राचीन काल में विंध्य पर्वत पर क्रोधन नामक एक क्रूर बहेलिया रहता था। क्रोधन ने अपनी पूरी जिंदगी गलत कार्य जैसे हिंसा, मद्यपान, आदि में व्यतीत कर दी थी। जब उसके जीवन का अंतिम समय आया तब यमराज ने दूतों को क्रोधन को लाने को भेजा। यमदूतों ने क्रोधन को इस बात की जानकारी दे दी कि कल उसके जीवन का अंतिम दिन होगा। मृत्यु के भय से डरकर क्रोधन महर्षि अंगिरा की शरण में पहुंच गया। महर्षि ने क्रोधन की दशा को देखकर उस पर दया की और उसे पापाकुंशा एकादशी का व्रत करने को कहा। इस व्रत के करने से क्रोधन के सभी पाप नष्ट हो गए और भगवान की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति हुई।
पापाकुंशा एकादशी शुभमुहूर्त
आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 अक्टूबर को दोपहर 03 बजकर 14 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानी 25 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी।