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Papankusha Ekadashi 2022: पापाकुंशा एकादशी आज, जानें महत्व, पूजाविधि और शुभ मुहूर्त
Thu, 06 Oct 2022 07:37 AM IST
विनोद शुक्ला
अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 06 Oct 2022 07:37 AM IST
सार
ज्योतिष पंचांग के अनुसार अश्विन मास की एकादशी तिथि 5 अक्टूबर को दोपहर 12:00 बजे से आरंभ हो जाएगी और इसका समापन अगले दिन 6अक्टूबर को सुबह 9:40 पर होगा। उदया तिथि 6 अक्टूबर को होने के कारण पापांकुशा एकादशी व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा।
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ekadashi 2022: एकादशी पर भगवान विष्णु के निमित्त व्रत-पूजा एवं तिल दान करने से मनुष्य को सभी सुखों की प्राप्ति होती है।
- फोटो : istock
विस्तार
Papankusha Ekadashi 2022: भगवान विष्णु के निमित्त किया जाने वाला पापाकुंशा एकादशी व्रत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। एकादशी तिथि का व्रत जीवों के परम लक्ष्य,भगवद भक्ति को प्राप्त करने में सहायक होता है। यह दिन जगत के पालनहार श्री विष्णु की पूर्ण श्रद्धा से सेवा करने के लिए अति शुभकारी एवं फलदायक माना गया है ।इस दिन मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिये भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की जाती है।
पापाकुंशा एकादशी का महत्व
वैसे तो प्रत्येक एकादशी का अपना ही अलग महत्व है लेकिन पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति का सभी जाने-अनजाने में किए गए पापों का प्रायश्चित होता है। इस व्रत को करने से मन और आत्मा दोनों शुद्ध होते हैं। पापाकुंशा एकादशी एक हजार अश्वमेघ और सौ सूर्ययज्ञ करने के समान फल प्रदान करने वाली होती है। इस एकादशी व्रत के समान अन्य कोई व्रत नहीं है। इसके अतिरिक्त जो व्यक्ति इस एकादशी की रात्रि में जागरण करता है वह स्वर्ग का अधिकारी बनता है। इस एकादशी के दिन दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। पदम् पुराण के अनुसार जो व्यक्ति सुवर्ण,तिल,भूमि,गौ,अन्न,जल,जूते और छाते का दान करता है,उसे यमराज के दर्शन नहीं होते।
पूजाविधि
पापांकुशा एकादशी के दिन गरूड़ पर विराजमान भगवान विष्णु के दिव्य रूप की पूजा की जाती है। एकादशी तिथि के दिन सुबह उठकर स्नान आदि कार्य करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक कर पीला चन्दन,अक्षत,मोली,फल,फूल,मेवा आदि अर्पित करें एवं भगवान विष्णु की धूप व दीप से आरती उतारनी चाहिए। इसके बाद एकादशी की कथा सुननी चाहिए,एवं 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय'मंत्र का जितना संभव हो जप करें।
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क्या है कथा
शास्त्रों के अनुसार प्राचीन काल में विंध्य पर्वत पर एक क्रूर बहेलियां रहता था। उसने अपनी सारी जिंदगी हिंसा,लूटपाट,मद्यपान और गलत संगति में व्यतीत कर दी। जब उसका अंतिम समय आया तब यमराज के दूत बहेलिये को लेने आए और यमदूत ने बहेलिये से कहा कि कल तुम्हारे जीवन का अंतिम दिन है हम तुम्हें कल लेने आएंगे। यह बात सुनकर बहेलिया बहुत भयभीत हो गया और महर्षि अंगिरा के आश्रम में पहुंचा और महर्षि अंगिरा के चरणों पर गिरकर प्रार्थना करने लगा। महर्षि अंगिरा ने बहेलिये से प्रसन्न होकर कहा कि तुम अगले दिन ही आने वाली आश्विन शुक्ल एकादशी का विधि पूर्वक व्रत करना। बहेलिये ने महर्षि अंगिरा के बताए हुए विधान से विधि पूर्वक पापांकुशा एकादशी का व्रत किया। इस व्रत पूजन के बल से भगवान की कृपा से वह विष्णु लोक को गया।
श्री विष्णु स्तुतिमंत्र
शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये।।
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
एकादशी का शुभमुहूर्त
ज्योतिष पंचांग के अनुसार अश्विन मास की एकादशी तिथि 5 अक्टूबर को दोपहर 12:00 बजे से आरंभ हो जाएगी और इसका समापन अगले दिन 6अक्टूबर को सुबह 9:40 पर होगा। उदया तिथि 6 अक्टूबर को होने के कारण पापांकुशा एकादशी व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा।
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पापाकुंशा एकादशी का महत्व
वैसे तो प्रत्येक एकादशी का अपना ही अलग महत्व है लेकिन पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति का सभी जाने-अनजाने में किए गए पापों का प्रायश्चित होता है। इस व्रत को करने से मन और आत्मा दोनों शुद्ध होते हैं। पापाकुंशा एकादशी एक हजार अश्वमेघ और सौ सूर्ययज्ञ करने के समान फल प्रदान करने वाली होती है। इस एकादशी व्रत के समान अन्य कोई व्रत नहीं है। इसके अतिरिक्त जो व्यक्ति इस एकादशी की रात्रि में जागरण करता है वह स्वर्ग का अधिकारी बनता है। इस एकादशी के दिन दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। पदम् पुराण के अनुसार जो व्यक्ति सुवर्ण,तिल,भूमि,गौ,अन्न,जल,जूते और छाते का दान करता है,उसे यमराज के दर्शन नहीं होते।
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पूजाविधि
पापांकुशा एकादशी के दिन गरूड़ पर विराजमान भगवान विष्णु के दिव्य रूप की पूजा की जाती है। एकादशी तिथि के दिन सुबह उठकर स्नान आदि कार्य करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक कर पीला चन्दन,अक्षत,मोली,फल,फूल,मेवा आदि अर्पित करें एवं भगवान विष्णु की धूप व दीप से आरती उतारनी चाहिए। इसके बाद एकादशी की कथा सुननी चाहिए,एवं 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय'मंत्र का जितना संभव हो जप करें।
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क्या है कथा
शास्त्रों के अनुसार प्राचीन काल में विंध्य पर्वत पर एक क्रूर बहेलियां रहता था। उसने अपनी सारी जिंदगी हिंसा,लूटपाट,मद्यपान और गलत संगति में व्यतीत कर दी। जब उसका अंतिम समय आया तब यमराज के दूत बहेलिये को लेने आए और यमदूत ने बहेलिये से कहा कि कल तुम्हारे जीवन का अंतिम दिन है हम तुम्हें कल लेने आएंगे। यह बात सुनकर बहेलिया बहुत भयभीत हो गया और महर्षि अंगिरा के आश्रम में पहुंचा और महर्षि अंगिरा के चरणों पर गिरकर प्रार्थना करने लगा। महर्षि अंगिरा ने बहेलिये से प्रसन्न होकर कहा कि तुम अगले दिन ही आने वाली आश्विन शुक्ल एकादशी का विधि पूर्वक व्रत करना। बहेलिये ने महर्षि अंगिरा के बताए हुए विधान से विधि पूर्वक पापांकुशा एकादशी का व्रत किया। इस व्रत पूजन के बल से भगवान की कृपा से वह विष्णु लोक को गया।
श्री विष्णु स्तुतिमंत्र
शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये।।
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
एकादशी का शुभमुहूर्त
ज्योतिष पंचांग के अनुसार अश्विन मास की एकादशी तिथि 5 अक्टूबर को दोपहर 12:00 बजे से आरंभ हो जाएगी और इसका समापन अगले दिन 6अक्टूबर को सुबह 9:40 पर होगा। उदया तिथि 6 अक्टूबर को होने के कारण पापांकुशा एकादशी व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा।