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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Mauni Amavasya 2025 remove pitru dosh by path of Pitru Kavach and pitru stotram in hindi

Mauni Amavasya: महाकुंभ में अमृत स्नान के समय करें इस स्तोत्र का पाठ, पितृ दोष होगा दूर

Tue, 28 Jan 2025 12:14 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 28 Jan 2025 12:14 PM IST
सार

Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या  29 जनवरी, बुधवार को है।  इस वर्ष की मौनी अमावस्या खास है क्योंकि इस दिन महाकुंभ का दूसरा अमृत स्नान आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर संगम में स्नान करें और अपने पूर्वजों की पूजा करें। इस दौरान पितृ स्त्रोत और पितृ कवच का पाठ करना न भूलें, इससे आपके पितृ देवता प्रसन्न होंगे।

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Mauni Amavasya 2025 remove pitru dosh by path of Pitru Kavach and pitru stotram in hindi
Mauni Amavasya Significance - फोटो : amar ujala

विस्तार

Pitru Strotam and Kawach Path on Mauni Amavasya Amrit Snan: मौनी अमावस्या का शुभ पर्व 29 जनवरी, बुधवार को मनाया जाएगा। इस अवसर पर प्रयागराज के महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं। मौनी अमावस्या के दिन पवित्र संगम में स्नान करने और उसके बाद दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। यह दिन महाकुंभ का दूसरा अमृत स्नान भी है, जो अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार, 29 जनवरी 2025 को मौनी अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन महाकुंभ का दूसरा अमृत स्नान भी है। मौनी अमावस्या के अवसर पर पवित्र नदी में स्नान और दान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन पितरों की पूजा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, और पितरों की कृपा से रुके हुए कार्य संपन्न होते हैं।

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Mauni Amavasya 2025 remove pitru dosh by path of Pitru Kavach and pitru stotram in hindi
Mauni Amavasya Significance - फोटो : freepik

।। अथ पितृस्तोत्र ।।

अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम् ।।

इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् । ।

मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा ।
तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि ।।

नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा ।
द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।

 देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।
अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि: ।।

प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च ।
योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।

 नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।
स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ।।

 सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।
नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ।।

अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।
अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ।।

ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय: ।
जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ।।
तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस: ।
नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज ।।

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Mauni Amavasya 2025 remove pitru dosh by path of Pitru Kavach and pitru stotram in hindi
Mauni Amavasya Significance - फोटो : अमर उजाला

।।पितृ कवच।।

कृणुष्व पाजः प्रसितिम् न पृथ्वीम् याही राजेव अमवान् इभेन।
तृष्वीम् अनु प्रसितिम् द्रूणानो अस्ता असि विध्य रक्षसः तपिष्ठैः॥
तव भ्रमासऽ आशुया पतन्त्यनु स्पृश धृषता शोशुचानः।
तपूंष्यग्ने जुह्वा पतंगान् सन्दितो विसृज विष्व-गुल्काः॥
प्रति स्पशो विसृज तूर्णितमो भवा पायु-र्विशोऽ अस्या अदब्धः।
यो ना दूरेऽ अघशंसो योऽ अन्त्यग्ने माकिष्टे व्यथिरा दधर्षीत्॥
उदग्ने तिष्ठ प्रत्या-तनुष्व न्यमित्रान् ऽओषतात् तिग्महेते।
यो नोऽ अरातिम् समिधान चक्रे नीचा तं धक्ष्यत सं न शुष्कम्॥
ऊर्ध्वो भव प्रति विध्याधि अस्मत् आविः कृणुष्व दैव्यान्यग्ने।
अव स्थिरा तनुहि यातु-जूनाम् जामिम् अजामिम् प्रमृणीहि शत्रून्।

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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Mauni Amavasya 2025 remove pitru dosh by path of Pitru Kavach and pitru stotram in hindi
Mauni Amavasya Significance - फोटो : अमर उजाला

दूसरे अमृत स्नान के लिए स्नान और दान का मुहूर्त
मौनी अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त स्नान और दान के लिए सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है। 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रात: 5:25 बजे से 6:18 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा। इस समय संगम स्नान और दान अत्यंत फलदायी होंगे। 
इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं है, लेकिन दोपहर 2:22 बजे से 3:05 बजे तक विजय मुहूर्त का निर्माण हो रहा है। 
इसके अलावा, शाम 5:55 बजे से 6:22 बजे तक गोधूलि मुहूर्त भी रहेगा, जिसमें स्नान और दान करना लाभकारी रहेगा। 
हालांकि, सुबह 11:34 बजे से 1:55 बजे तक राहुकाल रहेगा, जो हिंदू धर्म में शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। इसलिए, इस समय स्नान और दान न करना ही उचित होगा।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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